सुप्रीम कोर्ट ने थर्मल पावर प्लांट में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD) सिस्टम लगाने की मांग करने वाली याचिका को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि देरी से प्रदूषण बढ़ रहा है और स्वास्थ्य को खतरा है।
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को NGT जाने का निर्देश दिया।
- FGD सिस्टम सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए अनिवार्य हैं।
- श्रेणी 'A' के पावर प्लांट (NCR और बड़े शहरों के पास) पर विशेष ध्यान।
- अनुपालन की समय सीमा 2027 तक बढ़ाई गई है।
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह थर्मल पावर प्लांट में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD) प्रणालियों की स्थापना और संचालन सुनिश्चित करने की मांग के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का दरवाजा खटखटाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे विशेष रूप से NGT के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस याचिका के गुण-दोषों पर विचार नहीं करेगी, क्योंकि यह मामला पर्यावरण संबंधी नियामक निकायों के दायरे में है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वायु गुणवत्ता के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। FGD सिस्टम का मुख्य कार्य कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से निकलने वाली हानिकारक सल्फर डाइऑक्साइड गैस को कम करना है। यदि ये सिस्टम समय पर नहीं लगाए जाते हैं, तो शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ सकता है।
पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए NGT की विशेषज्ञता अनिवार्य है।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि FGD सिस्टम स्थापित करने की समय सीमा को बार-बार बढ़ाया गया है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। याचिका में मांग की गई थी कि देश भर के सभी श्रेणी 'A' के थर्मल पावर प्लांट, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) या दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के 10 किमी के दायरे में स्थित हैं, उन्हें समयबद्ध तरीके से इन प्रणालियों से लैस किया जाए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दिसंबर 2015 में उत्सर्जन मानकों के अनुपालन के संबंध में एक अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, कार्यान्वयन में देरी के कारण, अनुपालन की समय सीमा को लगातार आगे बढ़ाया गया है, जो वर्तमान में 2027 तक है।
Frequently Asked Questions
1. FGD सिस्टम क्या है?
यह एक तकनीक है जो थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड गैस को सोख लेती है ताकि वायु प्रदूषण कम हो सके।
2. श्रेणी 'A' पावर प्लांट क्या हैं?
वे पावर प्लांट जो NCR या 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के 10 किमी के दायरे में स्थित हैं, उन्हें श्रेणी 'A' में रखा गया है।