ग्राहम स्टेंस हत्याकांड के दोषी दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर दो साल से चुप्पी साधे ओडिशा सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिनों के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की रिमिशन याचिका पर निर्णय लेने में देरी के लिए ओडिशा सरकार को फटकारा।
  • कोर्ट ने राज्य सरकार को 10 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया, अन्यथा अधिकारियों को तलब किया जाएगा।
  • दोषी दारा सिंह ने अपनी उम्र और जेल में अच्छे व्यवहार का हवाला देते हुए समयपूर्व रिहाई की मांग की है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ग्राहम स्टेंस हत्याकांड के दोषी दारा सिंह (रबिंद्र कुमार पाल) की रिमिशन याचिका पर निर्णय लेने में हो रही अत्यधिक देरी पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने ओडिशा सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि वह इस मामले में निर्णय लेने से बच नहीं सकती।

अदालत ने पाया कि रिहाई की यह याचिका पिछले दो वर्षों से लंबित है। सुनवाई के दौरान, ओडिशा सरकार के वकील ने चार सप्ताह का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, "आप निर्णय लेने से बच नहीं सकते। आपको एक तरह या दूसरी तरह से फैसला करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो हम सचिव या संबंधित प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से तलब करेंगे।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला न केवल एक अपराधी की रिहाई का है, बल्कि यह राज्य सरकारों द्वारा न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी और प्रशासनिक निष्क्रियता को भी उजागर करता है। जब मामला इतने संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हत्याकांड से जुड़ा हो, तो प्रशासनिक देरी न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच तनाव पैदा करती है।

न्यायिक जवाबदेही केवल फैसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन फैसलों के प्रशासनिक कार्यान्वयन की समयबद्धता में भी निहित है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: दारा सिंह को 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो छोटे बेटों (6 और 10 वर्ष) की नृशंस हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। एक भीड़ ने उनके वाहन को आग लगा दी थी, जिससे तीनों की मौत हो गई थी। 2003 में ट्रायल कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई, जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास में बदल दिया और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इसकी पुष्टि की।

सिंह ने 2024 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ओडिशा की 2022 की समयपूर्व रिहाई नीति का लाभ मांगा। उसने दावा किया कि वह अपने कृत्यों पर "गहरा खेद" व्यक्त करता है और इसे "युवावस्था के जोश" का परिणाम बताता है। हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि उसकी रिमिशन याचिका को पहले पांच बार सेंटेंस रिव्यू बोर्ड द्वारा खारिज किया जा चुका है।

इसके अतिरिक्त, सिंह दो अन्य मामलों में भी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, जिनमें उसकी दोषसिद्धि 2007 में हुई थी और जिसकी पुष्टि हाल के वर्षों में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई है।

क्या आप जानते हैं?: दारा सिंह का आधिकारिक नाम रबिंद्र कुमार पाल है और वह भारत के सबसे चर्चित सांप्रदायिक हिंसा मामलों के दोषियों में से एक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: दारा सिंह ने रिहाई के लिए क्या आधार बताए हैं?
उत्तर: उसने अपनी उम्र, जेल में अच्छे आचरण, कैद की लंबी अवधि और अपने अपराध के लिए पश्चाताप को आधार बनाया है।

प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई कब तय की है?
उत्तर: कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर के लिए तय की है, जिसमें सरकार को अपना निर्णय बताना होगा।