मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में किसी भी व्यक्ति को विशेष प्राथमिकता नहीं दी जाती है। यह मामला राहुल गांधी द्वारा गलवान विवाद पर की गई टिप्पणियों से जुड़ा है।
- सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत में सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार किया जाता है।
- भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी को 'VVIP' ट्रीटमेंट देने और मामले को टालने का आरोप लगाया था।
- यह मामला 2020 के गलवान संघर्ष और सेना पर कथित टिप्पणियों से संबंधित आपराधिक कार्यवाही से जुड़ा है।
नई दिल्ली स्थित सर्वोच्च न्यायालय में बुधवार को उस समय गहमागहमी देखी गई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे एक मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान भाजपा प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। श्री भाटिया ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता के मामले को बार-बार स्थगित किया जा रहा है, जिससे न्याय प्रक्रिया में देरी हो रही है।
इस बहस की शुरुआत तब हुई जब श्री भाटिया ने राहुल गांधी की उस याचिका को 'डी-टैग' (अलग) करने की मांग की, जो 2020 के गलवान सीमा संघर्ष के संदर्भ में भारतीय सेना और चीनी आक्रमण पर की गई कथित टिप्पणियों से संबंधित आपराधिक कार्यवाही के खिलाफ दायर की गई थी। भाटिया ने तर्क दिया कि मामला पिछली बार दिसंबर में सूचीबद्ध था और अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 के लिए तय की गई थी, लेकिन सितंबर तक इसे फिर से सूचीबद्ध नहीं किया गया।
अदालत में अपनी दलील देते हुए गौरव भाटिया ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि मामले की लिस्टिंग में देरी का कारण "उल्लेखित व्यक्ति" (राहुल गांधी) हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी के साथ "VVIP" जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए और आरोप लगाया कि गांधी पक्ष सुनवाई से बचने के लिए "विलंबकारी रणनीति" (dilatory tactics) अपना रहा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this exchange highlights the intensifying legal battle between the ruling party's representatives and the primary opposition leader. When the highest court of the land has to explicitly state that "all parties are treated equally," it reflects a deeper societal and political polarization where judicial neutrality is frequently questioned by political entities for public narrative building.
"The Supreme Court's insistence on equality before the law, regardless of political stature, is fundamental to maintaining the public's trust in the Indian judiciary."
राहुल गांधी के वकील प्रसन्न एस. ने इन आरोपों का कड़ा विरोध किया और कहा कि अदालत में इस तरह के निराधार बयान देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यहाँ सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार किया जाता है।" इसके बाद बेंच ने श्री भाटिया को मामले को डी-टैग करने के लिए एक औपचारिक आवेदन जमा करने की सलाह दी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह पूरा विवाद अगस्त 2023 में सीमा सड़क संगठन (BRO) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी, उदय शंकर श्रीवास्तव द्वारा लखनऊ मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर एक शिकायत से शुरू हुआ था। लखनऊ कोर्ट ने फरवरी 2025 में राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मई 2025 में समन को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
| चरण | विवरण | समयसीमा |
|---|---|---|
| प्रारंभिक शिकायत | BRO अधिकारी द्वारा लखनऊ कोर्ट में केस | अगस्त 2023 |
| कोर्ट समन | लखनऊ मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी | फरवरी 2025 |
| हाईकोर्ट का फैसला | इलाहाबाद HC ने याचिका खारिज की | मई 2025 |
| सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप | विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर | 2025-2026 |
Frequently Asked Questions
1. राहुल गांधी के खिलाफ यह मामला क्यों दर्ज किया गया था?
यह मामला 2020 के गलवान सीमा विवाद के दौरान भारतीय सेना और चीनी आक्रमण पर की गई कथित टिप्पणियों के कारण एक सेवानिवृत्त BRO अधिकारी द्वारा दर्ज कराया गया था।
2. सीजेआई ने गौरव भाटिया को क्या निर्देश दिया?
सीजेआई ने स्पष्ट किया कि अदालत में कोई VVIP नहीं होता और उन्होंने भाटिया को मामले को डी-टैग करने के लिए औपचारिक आवेदन देने को कहा।