एल नीनो के कारण उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने 1,600 मेगावाट अतिरिक्त थर्मल पावर और बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम लागू करने की योजना बनाई है। राज्य का लक्ष्य कृषि और उद्योगों को निर्बाध बिजली प्रदान करना है।
- 1,600 मेगावाट नई थर्मल पावर की खरीद प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से की जाएगी।
- ईंधन संकट से बचने के लिए डेवलपर्स के लिए 15 दिनों का कोयला स्टॉक अनिवार्य।
- पीक डिमांड को संभालने के लिए 1,500 मेगावाट/6,000 मेगावाट-घंटा का बैटरी स्टोरेज सिस्टम तैनात किया जाएगा।
- अगस्त में औसत दैनिक बिजली खपत में 20% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य के पावर ग्रिड को मजबूत करने और एल नीनो (El Niño) से जुड़ी जलवायु चुनौतियों के बीच 24x7 गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत ऊर्जा रोडमैप पेश किया है। ऊर्जा विभाग के विशेष मुख्य सचिव के. विजयनंद ने मंगलवार को विद्युत सौधा में आयोजित आंध्र प्रदेश पावर कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक के दौरान इस रणनीति का खुलासा किया।
सरकार की योजना के अनुसार, राज्य प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया (Tariff-based competitive bidding) के माध्यम से 1,600 मेगावाट की अतिरिक्त थर्मल पावर प्राप्त करेगा। बिजली उत्पादन में किसी भी तरह के व्यवधान को रोकने के लिए, डेवलपर्स के लिए 15 दिनों का अनिवार्य कोयला स्टॉक बनाए रखना आवश्यक होगा। साथ ही, APGENCO को पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से आयातित कोयला खरीदने की अनुमति दी गई है ताकि घरेलू आपूर्ति में कमी आने पर विकल्प मौजूद रहे।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि आंध्र प्रदेश का यह कदम केवल बिजली की कमी को दूर करना नहीं है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का एक मॉडल तैयार करना है। अगस्त में औसत दैनिक बिजली खपत बढ़कर 269 मिलियन यूनिट हो गई है, जबकि पीक डिमांड 286 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है। यदि समय रहते बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं किया गया, तो औद्योगिक विकास और कृषि उत्पादकता पर गंभीर असर पड़ सकता था।
शाम के समय बढ़ने वाली पीक डिमांड को पूरा करने और सौर ऊर्जा के नुकसान (spillage) को कम करने के लिए, राज्य रणनीतिक स्थानों पर 1,500 मेगावाट/6,000 मेगावाट-घंटा का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तैनात कर रहा है। इसके अतिरिक्त, NHPC के साथ साझेदारी में केंद्र सरकार की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना के तहत एक और 500 मेगावाट/1,000 मेगावाट-घंटा स्टोरेज प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है।
"ऊर्जा भंडारण और विविध स्रोतों का एकीकरण ही जलवायु परिवर्तन के दौर में ग्रिड स्थिरता की एकमात्र गारंटी है।"
राज्य सरकार 1,344 मेगावाट के पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट का भी मूल्यांकन कर रही है और 500 मेगावाट की अल्पकालिक पंप्ड स्टोरेज सेवाओं के लिए APERC से मंजूरी लेने की योजना बना रही है। सितंबर महीने में बिजली की मांग 14,150 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसे संतुलित करना सरकार की प्राथमिकता है।
| सुविधा/लक्ष्य | विवरण |
|---|---|
| नई थर्मल पावर | 1,600 मेगावाट |
| बैटरी स्टोरेज (BESS) | 1,500 मेगावाट / 6,000 मेगावाट-घंटा |
| अनिवार्य कोयला स्टॉक | 15 दिन |
| अनुमानित सितंबर डिमांड | 14,150 मेगावाट |
Frequently Asked Questions
1. एल नीनो का बिजली आपूर्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
एल नीनो के कारण तापमान में वृद्धि होती है, जिससे एयर कंडीशनिंग और कूलिंग उपकरणों का उपयोग बढ़ता है और बिजली की मांग (Peak Demand) में भारी उछाल आता है।
2. DISCOMs को क्या निर्देश दिए गए हैं?
सभी वितरण कंपनियों (DISCOMs) को अगले 12 महीनों के लिए एक अग्रिम बिजली आपूर्ति योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से बचा जा सके।