भारतीयर यूनिवर्सिटी कर्मचारी कल्याण संघ के सदस्य ESI कटौती की वापसी और लंबित बोनस की मांग को लेकर तीसरे दिन भी धरने पर बैठे रहे।
- कर्मचारी ₹500 से ₹3,000 तक की अवैध ESI बैकलाग कटौती का विरोध कर रहे हैं।
- मांगों में कटौती की वापसी और पिछले दो वर्षों के लंबित पोंगल बोनस का भुगतान शामिल है।
- लगभग 450 कर्मचारी वेतन कटौती से प्रभावित हुए हैं।
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने वित्त समिति और उच्च शिक्षा सचिव की मंजूरी की बात कही है।
भारतीयर यूनिवर्सिटी में तनाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि कर्मचारी कल्याण संघ के सदस्य बुधवार को लगातार तीसरे दिन धरने पर रहे। विवाद की मुख्य जड़ विश्वविद्यालय द्वारा कर्मचारियों के मासिक वेतन से कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) की बैकलाग राशि काटने का निर्णय है, जिसे संघ ने ESI मानदंडों का सीधा उल्लंघन बताया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 450 कर्मचारियों के जुलाई वेतन से ₹1,000 से ₹3,000 के बीच की कटौती की गई, और अगस्त के वेतन से ₹500 की अतिरिक्त कटौती की गई। संघ का तर्क है कि नवंबर 2019 से मार्च 2025 की अवधि के लिए कर्मचारी योगदान जमा करने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की थी, न कि व्यक्तिगत कर्मचारियों की।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह संघर्ष केवल कुछ हज़ार रुपयों का नहीं है, बल्कि यह राज्य विश्वविद्यालयों के भीतर प्रशासनिक पारदर्शिता और कर्मचारी संबंधों की गहरी विफलता को दर्शाता है। जब ESI जैसे बुनियादी वैधानिक लाभों का गलत प्रबंधन किया जाता है, तो यह अविश्वास का माहौल पैदा करता है जो शैक्षणिक कार्यों को ठप कर सकता है।
विरोध अब केवल ESI मुद्दे तक सीमित नहीं रहा है। संघ ने पिछले तीन वर्षों से स्थिर समेकित वेतन (consolidated salary) और पिछले दो वर्षों से पोंगल बोनस का भुगतान न होने पर गंभीर चिंता जताई है। इसके अलावा, 90 कर्मचारी कथित तौर पर अपने विस्तार आदेशों (extension orders) का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनकी पेशेवर स्थिति अनिश्चित हो गई है।
"ESI प्रेषण मानदंडों का पालन न करना और अनुबंध विस्तार में देरी विश्वविद्यालय की वित्तीय योजना के भीतर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक संकट का संकेत देती है।"
हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रशासन, ESI अधिकारियों और संघ को मिलाकर एक त्रिपक्षीय समिति बनाने का वादा किया था, लेकिन समय सीमा न दिए जाने के कारण प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। विश्वविद्यालय का कहना है कि वेतन वृद्धि और बोनस के संबंध में निर्णय उच्च शिक्षा सचिव के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
विश्वविद्यालय सूत्रों ने संकेत दिया है कि ESI रिफंड की मांग को सचिव के संज्ञान में लाया जाएगा, और इस मुद्दे को हल करने के लिए महीने के अंत तक वित्त समिति की बैठक बुलाने की अनुमति मांगी जाएगी।
कर्मचारी शिकायतों का सारांश
| मुद्दा | कर्मचारी दावा | विश्वविद्यालय का पक्ष |
|---|---|---|
| ESI कटौती | अवैध; BU द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए | वित्त समिति द्वारा समीक्षा लंबित |
| पोंगल बोनस | 2 साल से बकाया | उच्च शिक्षा सचिव की मंजूरी आवश्यक |
| विस्तार आदेश | 90 कर्मचारियों के लिए लंबित | वित्त समिति की मंजूरी लंबित |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: BU कर्मचारी विशेष रूप से ESI के खिलाफ विरोध क्यों कर रहे हैं?
वे विरोध कर रहे हैं क्योंकि विश्वविद्यालय ने उनके वेतन से बैकलाग ESI राशि काटी, जिसे संघ का दावा है कि मानदंडों के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए था।
प्रश्न 2: बातचीत की वर्तमान स्थिति क्या है?
अब तक की बातचीत किसी समाधान तक नहीं पहुंची है, जिससे रिफंड और बोनस के लिए स्पष्ट समय सीमा मिलने तक धरना जारी रहने का निर्णय लिया गया है।