बीजू जनता दल (BJD) ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2026 के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। पार्टी का दावा है कि इस कानून से ओडिशा को 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बकाया राजस्व का नुकसान होगा।
- बीजेडी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से MMDR संशोधन अधिनियम 2026 को वापस लेने की अपील की।
- दावा है कि ओडिशा को ₹1 लाख करोड़ से अधिक के बकाया और ₹12,000 करोड़ वार्षिक राजस्व का नुकसान होगा।
- पार्टी ने इसे राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार बताया है।
भुवनेश्वर में बुधवार को बीजू जनता दल (BJD) के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य खान और खनिज (विकास और विनियमन) (MMDR) संशोधन अधिनियम, 2026 के विनाशकारी प्रभावों की ओर केंद्र सरकार और राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित करना था। बीजेडी नेताओं ने राज्यपाल हरि बाबू कम्बम्पति के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें इस अधिनियम को तुरंत वापस लेने की मांग की गई है।
बीजेडी का तर्क है कि ओडिशा देश के सबसे खनिज-संपन्न राज्यों में से एक है और लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और क्रोमाइट जैसे संसाधनों के माध्यम से भारत के औद्योगिक विकास में इसका अतुलनीय योगदान रहा है। पार्टी के अनुसार, खनिज संसाधन राज्य की प्राकृतिक संपत्ति हैं और ऐतिहासिक रूप से राजस्व का मुख्य स्रोत रहे हैं।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल राजस्व का नहीं बल्कि 'राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता' का है। 24 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने राज्य सरकारों को खनिज भूमि पर कर लगाने का अधिकार दिया था। लेकिन 2026 का यह नया संशोधन उस अधिकार को सीमित करता दिख रहा है। यदि यह कानून लागू रहता है, तो ओडिशा जैसे खनिज-प्रधान राज्य अपनी विकास योजनाओं के लिए आवश्यक फंड से वंचित रह सकते हैं।
"खनिज संसाधनों पर केंद्र का बढ़ता नियंत्रण सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की मूल भावना के विपरीत है और राज्यों की वित्तीय स्थिति को कमजोर करता है।"
ज्ञापन में विशेष रूप से धारा 2, 9D और 13 का उल्लेख किया गया है। बीजेडी का आरोप है कि धारा 2 के तहत 'खनिज युक्त भूमि' को केंद्र के नियंत्रण में शामिल करना और धारा 9D के माध्यम से राज्यों के कर लगाने के अधिकार को प्रतिबंधित करना सीधे तौर पर ओडिशा के वित्तीय हितों पर प्रहार है।
बीजेडी ने राज्यपाल से अनुच्छेद 244(1) (पांचवीं अनुसूची) के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने का आग्रह किया है, जो अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातियों के प्रशासन के लिए एक विशेष संवैधानिक ढांचा प्रदान करता है। पार्टी का मानना है कि यह संशोधन न केवल सरकारी खजाने को प्रभावित करेगा, बल्कि बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश को भी बाधित करेगा।
| विवरण | सुप्रीम कोर्ट फैसला (2024) | MMDR संशोधन (2026) |
|---|---|---|
| कर लगाने का अधिकार | राज्यों को अधिकार प्राप्त | केंद्र द्वारा सीमित/प्रतिबंधित |
| संभावित राजस्व (ओडिशा) | ₹1 लाख करोड़+ (बकाया) | भारी वित्तीय हानि का जोखिम |
| नियंत्रण | राज्य-केंद्र संतुलन | केंद्र का बढ़ता प्रभुत्व |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. MMDR संशोधन अधिनियम 2026 का ओडिशा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
बीजेडी के अनुसार, इससे राज्य को ₹1 लाख करोड़ से अधिक के पुराने बकाये और ₹12,000 करोड़ के वार्षिक राजस्व का नुकसान हो सकता है।
2. बीजेडी ने राष्ट्रपति से क्या मांग की है?
बीजेडी ने मांग की है कि इस संशोधन को वापस लिया जाए ताकि राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रहें।