सीबीआई ने सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (CPRI) के संयुक्त निदेशक राजाराम मोहनराव चेन्नु के खिलाफ ₹3.77 करोड़ से अधिक की आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया है, जो उनकी ज्ञात आय का लगभग 1,145% है।
- संयुक्त निदेशक राजाराम मोहनराव चेन्नु पर अपनी ज्ञात आय से 15 गुना अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप।
- सीबीआई ने बेंगलुरु स्थित आवास से ₹3.59 करोड़ नकद और विभिन्न विदेशी मुद्राएं जब्त कीं।
- मामला सुधीर ग्रुप ऑफ कंपनीज के लिए अनुकूल परीक्षण रिपोर्ट जारी करने के बदले रिश्वत लेने से जुड़ा है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने केंद्रीय बिजली निकायों में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सीबीआई ने सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (CPRI) के संयुक्त निदेशक राजाराम मोहनराव चेन्नु के खिलाफ एक नया प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज किया है। यह कानूनी कार्रवाई एक पिछले रिश्वत मामले के बाद हुई है, जिसने अवैध धन संचय के एक व्यवस्थित पैटर्न को उजागर किया है।
एफआईआर के अनुसार, चेन्नु ने 1 जनवरी, 2024 और 8 जनवरी, 2026 के बीच जानबूझकर खुद को समृद्ध किया। एजेंसी के विस्तृत ऑडिट में पाया गया कि उनके पास ₹3,77,53,893 की आय से अधिक संपत्ति थी। इसी अवधि के दौरान उनके वैध आय स्रोतों की तुलना में, यह राशि आश्चर्यजनक रूप से 1,145.70 प्रतिशत अधिक है, जो उनकी ज्ञात कमाई का लगभग 15 गुना है।
वित्तीय विवरण का विश्लेषण
चेन्नु, जिन्होंने 2009 में ग्रेड-II इंजीनियरिंग अधिकारी के रूप में CPRI जॉइन किया था और अगस्त 2025 तक संयुक्त निदेशक बने, उनकी संपत्ति में भारी उछाल देखा गया। जांच अवधि की शुरुआत में उनकी संपत्ति ₹24,66,332 आंकी गई थी। अवधि के अंत तक, यह आंकड़ा बढ़कर ₹4,11,73,681 हो गया। सीबीआई ने उनकी कुल ज्ञात आय ₹32,95,274 और खर्च ₹23,41,818 बताया है, जिससे उनकी संपत्ति में एक बड़ा और अस्पष्ट अंतर सामने आया है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला राष्ट्रीय बिजली निकायों की प्रमाणन प्रक्रियाओं में एक गंभीर खामी को उजागर करता है। जब CPRI जैसे संस्थानों के अधिकारी, जो सुरक्षा और गुणवत्ता परीक्षण के लिए जिम्मेदार होते हैं, रिश्वत लेते हैं, तो यह पूरे देश में उपयोग किए जाने वाले विद्युत उपकरणों की अखंडता से समझौता करता है, जिससे राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे को खतरा हो सकता है।
जब्त की गई विदेशी मुद्राओं की भारी मात्रा यह संकेत देती है कि यह केवल घरेलू रिश्वतखोरी नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी खातों का एक परिष्कृत नेटवर्क हो सकता है।
जांच की शुरुआत एक ट्रैप ऑपरेशन से हुई थी, जिसमें सीबीआई ने सुधीर पावर लिमिटेड के निदेशक अतुल खन्ना से लिए गए ₹9,49,400 की रिश्वत बरामद की थी। इसके बाद बेंगलुरु स्थित आवास पर छापेमारी के दौरान नकद के साथ-साथ अमेरिकी डॉलर, यूरो, यूएई दिरहम और चीनी युआन जैसी कई विदेशी मुद्राएं बरामद हुईं।
वित्तीय तुलना
| विवरण | राशि (INR) |
|---|---|
| ज्ञात आय (अवधि) | ₹32,95,274 |
| कुल संपत्ति (अवधि अंत) | ₹4,11,73,681 |
| आय से अधिक संपत्ति | ₹3,77,53,893 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: रिश्वत देने का मुख्य कारण क्या था?
आरोपी अधिकारी ने सुधीर ग्रुप ऑफ कंपनीज द्वारा निर्मित विद्युत उपकरणों के लिए अनुकूल परीक्षण रिपोर्ट जारी करने के बदले रिश्वत ली थी।
प्रश्न 2: छापेमारी के दौरान कौन सी विदेशी मुद्राएं मिलीं?
सीबीआई ने अमेरिकी डॉलर, हांगकांग डॉलर, सिंगापुर डॉलर, इंडोनेशियाई रुपिया, मलेशियाई रिंगिट, यूरो, चीनी युआन, स्वीडिश क्रोनोर और यूएई दिरहम जब्त किए।