केंद्र सरकार ने लद्दाख को विशेष सुरक्षा प्रदान करने के लिए अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव दिया है, लेकिन पुलिस और कानून-व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण अधिकारों पर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है।

  • केंद्र सरकार ने लद्दाख के लिए नए संवैधानिक प्रावधान 'अनुच्छेद 371(K)' का प्रस्ताव रखा है।
  • प्रस्तावित निर्वाचित निकाय को भूमि, संस्कृति, भाषा और पर्यावरण जैसे विषयों पर विधायी शक्तियां मिल सकती हैं।
  • पुलिस, कानून-व्यवस्था और वित्तीय शक्तियों पर अभी भी स्पष्टता का अभाव है।
  • अक्टूबर के पहले सप्ताह में ड्राफ्ट पर चर्चा के लिए अगली बैठक तय की गई है।

नई दिल्ली में गृह मंत्रालय (MHA) और लद्दाख उप-समिति के बीच हुई हालिया बैठक में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। केंद्र सरकार ने लद्दाख की विशिष्ट पहचान और हितों की रक्षा के लिए अनुच्छेद 371(K) को शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम लद्दाख के प्रतिनिधियों, जिनमें सोनम वांगचुक भी शामिल हैं, की लंबे समय से चली आ रही मांगों के जवाब में उठाया गया है।

बैठक के दौरान गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश (UT) स्तर पर एक शासन निकाय बनाया जाएगा, जिसका चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा। इस निकाय के पास भूमि, संस्कृति, भाषा, वन, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कानून बनाने की शक्ति होगी। वर्तमान में, अनुच्छेद 240 के तहत इन शक्तियों का प्रयोग भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the shift from a 'sui generis' (unique) arrangement to a specific Article 371 provision indicates the Centre's attempt to standardize Ladakh's protections within an existing constitutional framework. However, the refusal to grant immediate control over law and order suggests a strategic hesitation to fully relinquish central authority in a geopolitically sensitive border region.

लद्दाख के प्रतिनिधियों, विशेष रूप से लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) ने इस प्रस्ताव का स्वागत तो किया है, लेकिन वे अभी भी सशंकित हैं। उनका तर्क है कि जब तक एक विस्तृत लिखित ड्राफ्ट सामने नहीं आता, तब तक इस प्रस्ताव पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। सोनम वांगचुक ने जोर देकर कहा कि निर्वाचित विधानसभा की नौकरशाही पर सर्वोच्चता होनी चाहिए और पुलिस व कानून-व्यवस्था पर उनका नियंत्रण होना चाहिए।

लद्दाख में लोकतंत्र की बहाली केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें वास्तविक प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता का होना अनिवार्य है।

इसके अलावा, बैठक में सितंबर 2025 के आंदोलनों के दौरान हताहत हुए लोगों के लिए मुआवजे के पैकेज पर भी चर्चा हुई। LAB और KDA ने मांग की है कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सभी मामलों को चरणों में नहीं, बल्कि एक साथ वापस लिया जाए।

लद्दाख के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि निर्वाचित निकाय के गठन से पहले शासन तंत्र या भूमि हस्तांतरण में कोई भी अपरिवर्तनीय संरचनात्मक बदलाव किए गए, तो वे एक बार फिर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

क्या आप जानते हैं?: अनुच्छेद 371 भारतीय संविधान का एक विशेष प्रावधान है जो विभिन्न राज्यों (जैसे नागालैंड और मिजोरम) को उनकी सांस्कृतिक और सामाजिक विशिष्टताओं के कारण विशेष अधिकार देता है।
विषय वर्तमान स्थिति (अनुच्छेद 240) प्रस्तावित स्थिति (अनुच्छेद 371K)
विधायी शक्ति राष्ट्रपति के पास निर्वाचित निकाय के पास (सीमित विषय)
प्रशासन केंद्र द्वारा नियुक्त एलजी निर्वाचित विधानसभा (प्रस्तावित)
कानून-व्यवस्था पूर्णतः केंद्र के नियंत्रण में अभी भी अनिर्णित / चर्चा जारी

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अनुच्छेद 371(K) क्या है?
यह एक प्रस्तावित संवैधानिक प्रावधान है जिसके माध्यम से लद्दाख को विशेष सुरक्षा और प्रशासनिक स्वायत्तता देने की कोशिश की जा रही है।

प्रश्न 2: लद्दाख के प्रतिनिधि किस बात से असहमत हैं?
प्रतिनिधि मुख्य रूप से पुलिस, कानून-व्यवस्था और वित्तीय शक्तियों के हस्तांतरण की कमी और लिखित ड्राफ्ट के अभाव से असहमत हैं।