सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में 30 साल बाद बड़े बदलाव की तैयारी है। केंद्र सरकार अक्टूबर से देशभर में टूटे हुए चावल की मात्रा को 10% तक सीमित करेगी, जिसके लिए आंध्र प्रदेश के सफल मॉडल को अपनाया गया है।

  • केंद्र सरकार अक्टूबर से देशभर में PDS आपूर्ति में टूटे चावल की मात्रा 10% तक सीमित करेगी।
  • यह नीति आंध्र प्रदेश में चलाए गए एक सफल पायलट प्रोजेक्ट पर आधारित है।
  • आम जनता को राहत देने के लिए प्याज, अरहर दाल और पाम तेल पर सब्सिडी दी जाएगी।
  • आंध्र प्रदेश में कम लागत वाली खुदरा बिक्री के लिए 'मी मार्ट्स' (Mee Marts) का विस्तार किया जा रहा है।

खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए आंध्र प्रदेश मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया है। अगले महीने से, देश भर की उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से आपूर्ति किए जाने वाले चावल में टूटे हुए चावल की मात्रा अधिकतम 10 प्रतिशत होगी। यह निर्णय आंध्र प्रदेश में शुरू किए गए एक पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य चावल की गुणवत्ता सुधारकर उसकी खपत बढ़ाना था।

आंध्र प्रदेश के नागरिक आपूर्ति मंत्री एन मनोहर ने दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठकों के बाद बताया कि इस नीति को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाना राज्य के लिए गर्व की बात है। यह कदम 30 साल पुरानी PDS चावल वितरण प्रणाली में एक युगांतरकारी परिवर्तन माना जा रहा है, जिससे देश के करोड़ों गरीब परिवारों को बेहतर गुणवत्ता वाला अनाज मिल सकेगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, PDS में अक्सर टूटे हुए चावल की अधिक मात्रा एक बड़ी समस्या रही है, जिससे अनाज की बर्बादी होती है और उपभोक्ता संतुष्टि कम होती है। टूटे चावल को 10% तक सीमित करके, सरकार न केवल पोषण में सुधार कर रही है, बल्कि लाभार्थियों के सम्मान को भी बढ़ा रही है। यह दर्शाता है कि सरकार अब केवल 'पेट भरने' के बजाय 'गुणवत्तापूर्ण पोषण' पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

"टूटे चावल की सीमा को 10% करना भारत के खाद्य सुरक्षा ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि किफ़ायती होने का मतलब गुणवत्ता से समझौता करना नहीं है।"

चावल के अलावा, केंद्र सरकार भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (NCCF) के साथ मिलकर आवश्यक वस्तुओं की महंगाई से लड़ने की तैयारी कर रही है। एल नीनो (El Nino) की स्थिति के कारण खुले बाजार में प्याज की कीमतें बढ़ गई हैं। इससे राहत दिलाने के लिए, केंद्रीय मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) का उपयोग करके प्याज को 32 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जाएगा, जो 115 రైతు बाजारों और मोबाइल काउंटरों के माध्यम से बेचा जाएगा।

इसके साथ ही, अरहर दाल और पाम तेल की आपूर्ति के लिए भी सकारात्मक निर्णय लिए गए हैं। लगभग 1.2 लाख टन अरहर दाल और 86,400 किलोलीटर पाम तेल रियायती दरों पर 1.4 लाख परिवारों को वितरित किया जाएगा। इन वस्तुओं की कीमत खुले बाजार की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम होगी।

बुनियादी ढांचे के स्तर पर, आंध्र प्रदेश NCCF के सहयोग से 1,000 'मी मार्ट्स' (Mee Marts) शुरू कर रहा है, ताकि गुणवत्तापूर्ण सामान कम कीमतों पर उपलब्ध हो सके। साथ ही, राज्य सरकार आगामी खरीफ सीजन के लिए लगभग 38 लाख टन धान की खरीद की तैयारी कर रही है।

क्या आप जानते हैं?: भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा नेटवर्कों में से एक है, जो प्रतिदिन करोड़ों लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करती है।
वस्तु बाजार की स्थिति सरकारी हस्तक्षेप
टूटा चावल गुणवत्ता में भिन्नता देशभर में 10% की सीमा तय
प्याज कीमतों में वृद्धि (एल नीनो) 32 रुपये/किलो पर सब्सिडी
दाल/तेल बाजार में अस्थिरता बाजार से 30% कम दर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: टूटे चावल की नई सीमा कब से लागू होगी?
यह नीति अक्टूबर महीने से पूरे देश में लागू कर दी जाएगी।

प्रश्न 2: आंध्र प्रदेश में रियायती प्याज का वितरण कैसे होगा?
प्याज का वितरण 115 రైతు बाजारों और मोबाइल काउंटरों के माध्यम से किया जाएगा।