सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार निजी पीजी और हॉस्टल्स को विनियमित करने के लिए एक नया विधेयक ला रही है। इसके तहत अब सभी पीजी मालिकों को लाइसेंस लेना और एक सार्वजनिक पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
- सभी पीजी आवासों के लिए 90 दिनों के भीतर लाइसेंस और पुलिस क्लीयरेंस अनिवार्य।
- एक नया सार्वजनिक पोर्टल 'GovPG' लॉन्च किया जाएगा जहाँ सभी पंजीकृत पीजी की सूची होगी।
- 15 से अधिक छात्रों वाले पीजी में रात के समय सुरक्षा गार्ड और अनिवार्य सीसीटीवी की व्यवस्था होगी।
- कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 'संस्थागत आवास समिति' का गठन किया जाएगा।
दिल्ली की राजधानी में छात्रों के रहने की व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए दिल्ली सरकार एक व्यापक नियामक ढांचा तैयार कर रही है। हाल ही में सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला निजी छात्रावास के ढहने से पांच छात्रों सहित सात लोगों की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है। दिल्ली शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने पुष्टि की है कि इस विधेयक पर काम चल रहा है और अगले दो महीनों में इसके प्रावधान अंतिम रूप से तय कर लिए जाएंगे।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, प्रत्येक पीजी आवास को नगर निगम के क्षेत्रीय प्राधिकरण से लाइसेंस, स्थानीय पुलिस से क्लीयरेंस और एमसीडी (MCD) से संरचनात्मक एवं अग्नि सुरक्षा का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। प्रत्येक प्रतिष्ठान को एक विशिष्ट पंजीकरण संख्या दी जाएगी, जिससे अवैध निर्माण और असुरक्षित आवासों पर लगाम लगेगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली के मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर और लक्ष्मी नगर जैसे क्षेत्रों में लगभग 2 लाख कमरे निजी तौर पर किराए पर दिए गए हैं, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। इस नियामक शून्यता ने न केवल सुरक्षा जोखिम बढ़ाए हैं, बल्कि छात्रों के लिए मनमाने किराए और घटिया जीवन स्थितियों को भी जन्म दिया है। यह विधेयक छात्रों को एक कानूनी सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।
"बिना किसी नियामक ढांचे के, पीजी व्यवसाय एक अनियंत्रित बाजार बन गया है जहाँ छात्रों की सुरक्षा की तुलना में मुनाफे को प्राथमिकता दी जाती है।"
सरकार एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल 'GovPG' शुरू करने की योजना बना रही है। इस पोर्टल पर पीजी मालिकों को अपनी क्षमता, किराए में बदलाव और ऑडिट तिथियों की जानकारी अपडेट करनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्र इस पोर्टल के माध्यम से गुमनाम रूप से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे, जिनकी निगरानी क्षेत्रीय प्राधिकरण करेंगे।
सुरक्षा मानकों को कड़ा करते हुए, विधेयक में प्रावधान है कि सभी प्रवेश द्वारों और सामान्य क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनका फुटेज कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखा जाए। साथ ही, एक वार्डन की नियुक्ति अनिवार्य होगी जो आपातकालीन स्थिति में 15 मिनट के भीतर उपलब्ध हो सके।
| सुविधा/नियम | वर्तमान स्थिति (अनियंत्रित) | प्रस्तावित नियम (विधेयक के बाद) |
|---|---|---|
| पंजीकरण | कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं | अनिवार्य लाइसेंस और GovPG पोर्टल लिस्टिंग |
| सुरक्षा | स्वैच्छिक/न्यूनतम | अनिवार्य सीसीटीवी और रात का गार्ड (15+ छात्र) |
| शिकायत निवारण | कोई औपचारिक तंत्र नहीं | ऑनलाइन पोर्टल और संस्थागत आवास समिति |
Frequently Asked Questions
1. क्या यह नियम सभी पीजी पर लागू होगा?
हाँ, दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी निजी हॉस्टल्स और पीजी आवासों को इस कानून का पालन करना होगा।
2. 'GovPG' पोर्टल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य पारदर्शिता लाना है ताकि छात्र पंजीकृत पीजी की जांच कर सकें और अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुँचा सकें।