कालबुर्गी में माता माणिकेश्वरी आश्रम के भक्तों ने वित्तीय अनियमितताओं और ट्रस्ट के अवैध पुनर्गठन का आरोप लगाते हुए अध्यक्ष शिवय्या स्वामी के इस्तीफे की मांग की है।

  • अध्यक्ष शिवय्या स्वामी के खिलाफ वित्तीय गबन के गंभीर आरोप।
  • बिना सहमति के पुराने ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट बनाने का दावा।
  • 'कोटी लिंग' स्थापना के लिए एकत्र किए गए फंड के ऑडिट की मांग।

कर्नाटक के कालबुर्गी जिले के सेडम तालुक स्थित माता माणिकेश्वरी आश्रम (यानगुंडी) में गहरा विवाद पैदा हो गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में भक्तों ने शहर में विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें आश्रम के वर्तमान अध्यक्ष शिवय्या स्वामी के तत्काल निष्कासन और उनके कार्यकाल के दौरान हुए कथित वित्तीय भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई।

प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप यह है कि शिवय्या स्वामी ने मौजूदा ट्रस्ट को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या सदस्यों की सहमति के, उसे भंग कर दिया। इसके बाद, उन्होंने अपनी पसंद के नामांकित व्यक्तियों के साथ एक नया ट्रस्ट गठित कर लिया, जिसे भक्तों ने सत्ता हथियाने की कोशिश करार दिया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल प्रशासनिक विवाद नहीं है, बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है। जब आस्था के केंद्रों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते हैं, तो इससे न केवल सामुदायिक विश्वास डगमगाता है, बल्कि यह कानूनी जटिलताओं को भी जन्म देता है जो भविष्य में आश्रम के संचालन को प्रभावित कर सकते हैं।

धार्मिक ट्रस्टों का मनमाना पुनर्गठन न केवल ट्रस्ट डीड का उल्लंघन है, बल्कि यह भक्तों की आस्था के साथ एक बड़ा विश्वासघात है।

भक्त शिवकुमार पाटिल तेलकुर ने स्पष्ट किया कि वे इस बात की पारदर्शी जांच चाहते हैं कि आश्रम को प्राप्त दान का उपयोग कैसे किया गया और नए ट्रस्ट का गठन किन परिस्थितियों में हुआ। वहीं, पार्वती रेड्डी नामक एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कैश, सोने, चांदी के चढ़ावे और हुंडी संग्रह के व्यापक ऑडिट की मांग की है।

विशेष रूप से, आश्रम की पहाड़ी पर प्रस्तावित 'कोटी लिंग' की स्थापना के लिए जुटाए गए धन और उसके खर्चों के विवरण पर सवाल उठाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि जनता के पैसे से होने वाले हर कार्य का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।

भक्तों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक शिवय्या स्वामी को प्रबंधन से हटाया जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने ट्रस्ट के नियमों और आश्रम की पारंपरिक प्रथाओं के अनुसार प्रबंधन के पुनर्गठन की अपील की है।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय कानून के तहत, सार्वजनिक धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्टों का प्रबंधन राज्य के 'पब्लिक ट्रस्ट एक्ट' के अधीन होता है, जिसमें ट्रस्टियों के मनमाने बदलाव पर रोक होती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांग अध्यक्ष शिवय्या स्वामी को हटाना, वित्तीय अनियमितताओं की जांच करना और पुराने ट्रस्ट को बहाल करना है।

प्रश्न 2: 'कोटी लिंग' विवाद क्या है?
भक्तों का आरोप है कि कोटी लिंग की स्थापना के लिए एकत्र किए गए दान के उपयोग में पारदर्शिता नहीं है और वे इसका पूरा ऑडिट चाहते हैं।