होलेहोनूर और आसपास के गांवों के किसान 11 सितंबर को शिवमोगा में एक विशाल विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं, क्योंकि प्रस्तावित रिंग रोड से 26 गांवों की कृषि भूमि नष्ट होने का खतरा है।

  • प्रस्तावित रिंग रोड के खिलाफ 11 सितंबर को शिवमोगा में विरोध प्रदर्शन निर्धारित।
  • यह परियोजना राज्य के 52 शहरों को कवर करने वाली 'रोड नेटवर्क ग्रिड योजना' का हिस्सा है।

भद्रावती तालुक के होलेहोनूर और आसपास के गांवों के लोग शहरी विकास विभाग द्वारा जारी एक सरकारी आदेश के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। 18 जुलाई के इस आदेश में कर्नाटक के 52 शहरों, जिनमें होलेहोनूर, तिरथहल्ली और होसनगर शामिल हैं, के लिए रोड नेटवर्क ग्रिड योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। जहां सरकार इसे शहरी विकास और विस्तार को विनियमित करने के रूप में देख रही है, वहीं स्थानीय किसान इसे अपनी आजीविका पर हमला मान रहे हैं।

शिवमोगा तालुक के सुगुर में आयोजित एक बैठक के दौरान, किसानों ने अपनी चिंता व्यक्त की कि इस रिंग रोड के कारण 26 गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित कर ली जाएगी। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि शहर की कनेक्टिविटी पहले से ही शिवमोगा, भद्रावती, चित्रदुर्ग और दावणगेरे जैसे प्रमुख केंद्रों से उत्कृष्ट है, इसलिए नए रिंग रोड की कोई आवश्यकता नहीं है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह संघर्ष राज्य-स्तरीय शहरी नियोजन और ग्रामीण भूमि अधिकारों के बीच के तनाव को उजागर करता है। बुनियादी ढांचे के प्रति सरकार का 'टॉप-डाउन' दृष्टिकोण अक्सर कृषि समुदायों पर पड़ने वाले सूक्ष्म आर्थिक प्रभाव की अनदेखी करता है। इस मामले में, मौजूदा बाईपास की मौजूदगी के कारण परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

स्थानीय लोगों ने एक महत्वपूर्ण विरोधाभास की ओर भी इशारा किया: चित्रदुर्ग-शिवमोगा राजमार्ग (NH 369) पर बाईपास के उद्घाटन के बाद शहर में आने वाले वाहनों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे स्थानीय व्यापार प्रभावित हुआ है। उनका तर्क है कि एक और रिंग रोड शहर की अर्थव्यवस्था को और अधिक अलग-थलग कर देगा।

स्थानीय व्यवहार्यता अध्ययन के बिना ग्रामीण शहरों पर शहरी ग्रिड थोपना अक्सर अनावश्यक सामाजिक अशांति और आर्थिक विस्थापन का कारण बनता है।

कर्नाटक राज्य रायता संघ के अध्यक्ष एच.आर. बसवराजप्पा ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मानचित्र के अनुसार, सड़क मौजूदा राजमार्गों और जिला सड़कों के समानांतर चल रही है, जिससे किसानों की आय का स्रोत छिन जाएगा लेकिन परियोजना का कोई वास्तविक लाभ नहीं होगा।

शुक्रवार को होने वाला यह विरोध प्रदर्शन मिलगट्टा में नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशालय के कार्यालय पर समाप्त होगा, जहां बड़ी संख्या में लोग औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराएंगे।

क्या आप जानते हैं?: रोड नेटवर्क ग्रिड योजना कर्नाटक सरकार का एक व्यवस्थित प्रयास है ताकि छोटे शहरों के अनियोजित विस्तार को रोककर उन्हें एक मानक ढांचा दिया जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: किसान रिंग रोड का विरोध क्यों कर रहे हैं?
उनका मानना है कि मौजूदा कनेक्टिविटी के कारण इसकी जरूरत नहीं है और इससे 26 गांवों की उपजाऊ भूमि नष्ट हो जाएगी।

प्रश्न 2: विरोध प्रदर्शन कब और कहां हो रहा है?
विरोध प्रदर्शन 11 सितंबर को शिवमोगा में होगा, जो मिलगट्टा स्थित नगर एवं ग्राम नियोजन निदेशालय के कार्यालय पर समाप्त होगा।