कोलकाता स्थित GRSE ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए स्वदेशी अनुसंधान जहाज 'सागर मंथन' लॉन्च किया है। यह अत्याधुनिक जहाज भारत के 'डीप ओशन मिशन' को नई मजबूती प्रदान करेगा।
- GRSE द्वारा निर्मित ₹840 करोड़ की लागत वाला स्वदेशी अनुसंधान जहाज 'सागर मंथन' लॉन्च।
- यह जहाज 6 किलोमीटर की गहराई तक गहरे समुद्र का सर्वेक्षण और डेटा संग्रह करने में सक्षम है।
- 2028 की शुरुआत तक पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद, जो 'डीप ओशन मिशन' का हिस्सा है।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। कंपनी ने राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए विशेष रूप से निर्मित स्वदेशी महासागर अनुसंधान जहाज (ORV) 'सागर मंथन' को लॉन्च किया। इस जहाज का निर्माण भारत की समुद्री सीमाओं और गहरे समुद्र के रहस्यों को समझने की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया गया है।
तकनीकी विवरणों की बात करें तो 'सागर मंथन' की लंबाई 89.5 मीटर और चौड़ाई 18.8 मीटर है। इसका कुल वजन (ग्रॉस टनेज) 5,900 टन है और यह अधिकतम निरंतर रेटिंग (MCR) के 90% पर 14 नॉट की गति से चलने में सक्षम है। इस जहाज का नामकरण केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की पत्नी मंजू सिंह द्वारा किया गया, जबकि इसका शुभारंभ पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्मला की पत्नी कविता एलान्टी ने किया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, 'सागर मंथन' का लॉन्च केवल एक जहाज का निर्माण नहीं है, बल्कि यह भारत की 'ब्लू इकोनॉमी' (Blue Economy) की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। गहरे समुद्र में मौजूद दुर्लभ खनिजों और जैव विविधता की खोज भारत को वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और वैज्ञानिक नेतृत्व प्रदान करेगी। यह जहाज भारत की आत्मनिर्भरता के संकल्प को साकार करता है।
'सागर मंथन' का निर्माण भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमताओं के बढ़ते प्रभाव का प्रमाण है, जो हमें गहरे समुद्र के अन्वेषण में अग्रणी बनाएगा।
यह अनुसंधान जहाज समुद्र की 6 किमी की गहराई तक जियोफिजिकल सिस्मिक सर्वे और मल्टीबीम सर्वेक्षण करने में सक्षम होगा। इसके अलावा, यह जैविक नमूने एकत्र करने, पानी के तापमान और गहराई (CTD) की प्रोफाइलिंग करने और समुद्र तल से चट्टानों के नमूने निकालने के लिए उन्नत उपकरणों से लैस है। यह जहाज वायुमंडलीय अवलोकन और मौसम संबंधी डेटा एकत्र करने में भी सक्षम होगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 'सागर मंथन' को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT) द्वारा विकसित किए जा रहे ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (AUVs) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROVs) को लॉन्च और रिकवर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह इसे आधुनिक समुद्री अनुसंधान का एक चलता-फिरता केंद्र बनाता है।
GRSE का इतिहास सर्वेक्षण जहाजों के निर्माण में काफी समृद्ध रहा है। 1980 के दशक से ही यह नौसेना के लिए जहाज बना रहा है। हाल ही में मार्च में 'संशोधक' नामक बड़े सर्वेक्षण जहाज की डिलीवरी के बाद, GRSE अब नौसेना के लिए गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट और अगली पीढ़ी के ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स सहित कई अन्य प्लेटफार्मों पर काम कर रहा है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| लागत | ₹840 करोड़ |
| लंबाई/चौड़ाई | 89.5 मीटर / 18.8 मीटर |
| अधिकतम गहराई | 6 किलोमीटर |
| डिलीवरी तिथि | प्रारंभिक 2028 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. सागर मंथन जहाज का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य गहरे समुद्र का अन्वेषण, खनिज खोज और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के 'डीप ओशन मिशन' के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान करना है।
2. इस जहाज को किसने बनाया है?
इसे कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है।