दिग्गज पत्रकार नताशा सिंगर ने खुलासा किया है कि कैसे सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियां अपने व्यावसायिक हितों के लिए सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली और कंप्यूटर साइंस पाठ्यक्रम को बदल रही हैं।
- एप्पल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने स्कूलों में उद्योग-प्रायोजित पाठ्यक्रमों को तेजी से बढ़ावा दिया है।
- आलोचकों का तर्क है कि यह छात्रों को केवल 'आधा ज्ञान' दे रहा है, जो केवल व्यावसायिक उपकरणों तक सीमित है।
- जेन मार्गोलिस जैसे शोधकर्ता कंप्यूटर विज्ञान की एक अधिक समावेशी और गैर-व्यावसायिक दृष्टि के लिए लड़ रहे हैं।
अपनी नई पुस्तक, 'कोडिंग किड्स: बिग टेक्स बैटल टू रीमेक पब्लिक स्कूल्स' में, द न्यूयॉर्क टाइम्स की अनुभवी बिजनेस रिपोर्टर नताशा सिंगर ने इस बात का विश्लेषण किया है कि कैसे सिलिकॉन वैली की कंपनियां स्कूलों को अपने उत्पादों को अपनाने के लिए राजी कर रही हैं। सिंगर का तर्क है कि यह केवल शिक्षा का प्रसार नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है जिससे भविष्य की पीढ़ी को इन कंपनियों के ईकोसिस्टम का आदी बनाया जा सके।
स्वास्थ्य उद्योग की पूर्व रिपोर्टर रही सिंगर ने सिलिकॉन वैली के इस अभियान और 'बिग फार्मा' (बड़ी दवा कंपनियों) के चिकित्सा क्षेत्र में प्रभाव के बीच समानताएं देखी हैं। उन्होंने बताया कि कैसे एप्पल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले कुछ वर्षों में स्कूलों में भारी निवेश किया है ताकि उनके टूल्स को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जा सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि जब निजी कंपनियां सार्वजनिक पाठ्यक्रम तय करती हैं, तो शिक्षा का उद्देश्य 'सीखने' से बदलकर 'उत्पाद प्रशिक्षण' (Product Training) हो जाता है। यदि छात्र केवल Swift (एप्पल की भाषा) सीखते हैं, तो वे कंप्यूटर विज्ञान के मूल सिद्धांतों के बजाय एक विशिष्ट कंपनी के टूल के विशेषज्ञ बन रहे हैं।
सिंगर एक अध्याय में एप्पल द्वारा विकसित 2019 के एडवांस्ड प्लेसमेंट (AP) कंप्यूटर साइंस कोर्स का उदाहरण देती हैं। वह लिखती हैं कि यह वैसा ही है जैसे स्कूल Pfizer द्वारा प्रायोजित बायोलॉजी कोर्स या DuPont द्वारा प्रायोजित केमिस्ट्री कोर्स को अपना लें। यह स्थिति शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रकार की 'सामूहिक स्मृति लोप' (Collective Amnesia) को दर्शाती है।
"इतनी बड़ी बाजार शक्ति पहले कभी किसी एक पाठ्यक्रम के उद्देश्य के पीछे एकजुट नहीं हुई थी," नताशा सिंगर चेतावनी देती हैं।
हालांकि, पुस्तक में कुछ सकारात्मक पहलुओं का भी जिक्र है। सिंगर Code.org और उसके संस्थापक हादी परतोवी की सराहना करती हैं। हालांकि वह इस बात पर सवाल उठाती हैं कि Code.org ने कंप्यूटर विज्ञान को केवल 'कोडिंग' तक सीमित कर दिया है और इसमें डिज्नी और स्टार वार्स जैसे व्यावसायिक तत्वों को जोड़ा है, लेकिन वह यह भी मानती हैं कि परतोवी के बिना अमेरिकी स्कूलों में इस स्तर पर कंप्यूटर विज्ञान नहीं पहुँच पाता।
पुस्तक में जेन मार्गोलिस के योगदान पर भी प्रकाश डाला गया है। मार्गोलिस एक ऐसी शोधकर्ता हैं जिन्होंने तकनीकी क्षेत्रों में लैंगिक असमानता के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। उनका मानना है कि वर्तमान कॉर्पोरेट-आधारित दृष्टिकोण मुख्य रूप से मध्यम वर्ग के लड़कों को आकर्षित करता है, जिससे लड़कियां और हाशिए पर रहने वाले समुदाय इस क्षेत्र से दूर रह जाते हैं।
| दृष्टिकोण | कॉर्पोरेट-नेतृत्व (Big Tech) | अकादमिक-नेतृत्व (शोधकर्ता) |
|---|---|---|
| मुख्य लक्ष्य | टूल दक्षता और ब्रांड निष्ठा | कम्प्यूटेशनल सोच और समानता |
| पाठ्यक्रम | प्रोप्राइटरी भाषाएं (जैसे Swift) | सार्वभौमिक CS सिद्धांत |
| जनसांख्यिकी | अक्सर विशेषाधिकार प्राप्त समूहों तक सीमित | समावेशिता और विविधता पर ध्यान |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: पुस्तक में Code.org की मुख्य आलोचना क्या है?
उत्तर: हालांकि इसने कंप्यूटर विज्ञान का विस्तार किया, लेकिन इसकी आलोचना इस बात के लिए की गई कि इसने CS को केवल कोडिंग तक सीमित कर दिया और इसमें अत्यधिक व्यावसायिकता को बढ़ावा दिया।
प्रश्न: लेखिका ने बिग टेक की तुलना बिग फार्मा से क्यों की?
उत्तर: क्योंकि दोनों ही उद्योग अपनी वित्तीय शक्ति का उपयोग करके सार्वजनिक मानकों और नीतियों को इस तरह प्रभावित करते हैं कि स्वतंत्र विकल्पों के बजाय उनके अपने उत्पादों को प्राथमिकता मिले।