कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती घोटाले में आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और उनके सहयोगी बसवराज कन्नले को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सीआईडी इस मामले में ओएमआर शीट और सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़ की जांच कर रही है।

  • आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बसवराज कन्नले 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए।
  • KPSC पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं और ओएमआर शीट में हेरफेर का आरोप।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मामले की जांच कर रहा है; सदस्य शांता होसामणी के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी।

बेंगलुरु में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में हुए कथित घोटाले ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। बुधवार को, सीआईडी हिरासत में 10 दिन बिताने के बाद, आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और उनके कथित सहयोगी बसवराज कन्नले को प्रथम एसीएमएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

जांच एजेंसी सीआईडी ने अदालत को सूचित किया कि वर्तमान में उन्हें आरोपियों की हिरासत की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्होंने जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर दोबारा हिरासत मांगने का विकल्प खुला रखा है। यह मामला भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और योग्यता की अनदेखी से जुड़ा है।

मामले की गहराई और आरोपियों की भूमिका

ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार, जो फरवरी 2024 से मार्च 2026 तक KPSC में परीक्षा नियंत्रक के रूप में कार्यरत थे, इस पूरे प्रकरण के केंद्र में हैं। जून में उन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) के निदेशक के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया था। दूसरी ओर, दिल्ली से गिरफ्तार किए गए बसवराज कन्नले Tumkur विश्वविद्यालय सिंडिकेट के सदस्य हैं और बीदर में भाजपा से जुड़े रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ फोटो वायरल होने के बाद उनकी राजनीतिक संबद्धता पर भी चर्चा तेज हो गई है।

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह घोटाला केवल कुछ व्यक्तियों की मिलीभगत नहीं है, बल्कि यह सरकारी भर्ती प्रणालियों में मौजूद गहरी खामियों को उजागर करता है। जब एक आईएएस अधिकारी और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति इस तरह के हेरफेर में शामिल होते हैं, तो यह योग्य उम्मीदवारों के भविष्य और सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रहार करता है।

भर्ती परीक्षाओं में ओएमआर शीट और सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ करना एक सुनियोजित अपराध है, जो प्रशासनिक तंत्र के भीतर गहरे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

सीआईडी की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि कैसे ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (OMR) शीट में बदलाव किया गया और सीसीटीवी फुटेज को कैसे नष्ट या बदला गया। इसके अलावा, आरोपियों के घरों और कार्यालयों की तलाशी के दौरान ऐसे दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं जो पैसे के लेन-देन (Money Trail) की पुष्टि करते हैं।

इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में अपनी जांच तेज कर दी है। KPSC सदस्य शांता होसामणी, जो ईडी की छापेमारी के बाद से लापता हैं, के खिलाफ हवाई अड्डों पर लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

क्या आप जानते हैं?: ओएमआर (OMR) तकनीक का उपयोग हजारों उत्तर पुस्तिकाओं को तेजी से और त्रुटिहीन तरीके से जांचने के लिए किया जाता है, लेकिन डिजिटल हेरफेर के माध्यम से इसमें बदलाव करना एक गंभीर साइबर अपराध माना जाता है।

1. इस घोटाले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपियों में पूर्व परीक्षा नियंत्रक आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और Tumkur यूनिवर्सिटी सिंडिकेट सदस्य बसवराज कन्नले शामिल हैं।

2. ईडी (ED) इस मामले में क्या कर रही है?
ईडी वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है और फरार सदस्य शांता होसामणी की तलाश कर रही है।