पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय की हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है। सरकार का आरोप है कि रॉय ने अपने बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा किए हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
- पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सुमित रॉय की हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
- आरोप है कि पीए सुमित रॉय ने अपने बैंक खातों में लगभग 15 करोड़ रुपये जमा किए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कल सुनवाई करेगा, जबकि कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले ही अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक गंभीर दलील पेश की, जिसमें टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित रॉय की हिरासत में पूछताछ (Custodial Interrogation) की आवश्यकता पर जोर दिया गया। यह मामला सलबोनी लैंड ग्रैब (भूमि हड़पने) के घोटाले से जुड़ा है, जिसमें धोखाधड़ी और जालसाजी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
केंद्र सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत और अन्य न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि सुमित रॉय जांच के दौरान टाल-मटोल कर रहे हैं। मेहता ने अदालत में प्रस्तुत ट्रांसक्रिप्ट का हवाला देते हुए कहा कि रॉय की भूमिका संदिग्ध है और उनके बैंक खातों में भारी मात्रा में नकदी जमा की गई है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this case is not just about a personal assistant but potentially points toward a larger network of financial irregularities within the political machinery of West Bengal. The disparity between a PA's official salary and the alleged deposits of ₹15 crore creates a significant 'curiosity gap' for investigators, suggesting the possibility of money laundering or proxy holdings.
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि शुरुआती जांच में 71 लाख रुपये के जमा की बात सामने आई थी, लेकिन विस्तृत जांच से पता चला है कि कुल जमा राशि लगभग 15 करोड़ रुपये है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक निजी सचिव के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई और क्या यह केवल 'आइसबर्ग की नोक' (Tip of the iceberg) है, जिसके पीछे कोई बहुत बड़ा घोटाला छिपा है।
"जब एक प्रशासनिक सहायक के खाते में करोड़ों रुपये बिना किसी स्पष्ट स्रोत के जमा होते हैं, तो यह सीधे तौर पर वित्तीय अपराध और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।"
दूसरी ओर, सुमित रॉय के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने इन दावों का खंडन किया। उन्होंने तर्क दिया कि पूरी पूछताछ की वीडियोग्राफी की गई थी और रॉय ने सभी सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां मुख्य अपराध के बजाय टीएमसी की कार्यप्रणाली, भर्ती और फंडिंग के बारे में सवाल पूछ रही हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: सलबोनी भूमि घोटाला पश्चिम बंगाल के उन कई मामलों में से एक है जहां सरकारी या निजी जमीनों के अवैध अधिग्रहण के आरोप लगे हैं। इस मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले 3 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने रॉय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
Frequently Asked Questions
1. सुमित रॉय पर मुख्य आरोप क्या हैं?
उन पर सलबोनी लैंड ग्रैब मामले में शामिल होने, धोखाधड़ी करने और अपने बैंक खातों में संदिग्ध तरीके से करोड़ों रुपये जमा करने का आरोप है।
2. सुप्रीम कोर्ट ने अब तक क्या आदेश दिया है?
कोर्ट ने फिलहाल रॉय को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है, लेकिन सरकार को विस्तृत जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करने का निर्देश दिया है।