बीबीसी की रिपोर्ट के बाद मेटा के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देने के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद NCPCR ने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है।
- मेटा के वरिष्ठ अधिकारी NCPCR के सामने पेश हुए।
- बीबीसी आई (BBC Eye) की रिपोर्ट के बाद जांच शुरू हुई।
- इंस्टाग्राम और फेसबुक के एल्गोरिदम पर सामग्री की निगरानी में गंभीर खामियां पाई गईं।
- भारत सरकार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सख्त नोटिस जारी किया।
नई दिल्ली में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक. के खिलाफ एक गहन जांच शुरू की है। बुधवार को फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को आयोग के समक्ष पेश होना पड़ा। यह कार्रवाई मेटा के प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री (CSAM) से जुड़े विज्ञापनों के कथित प्रसार के बाद की गई है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 3 जुलाई को बीबीसी आई (BBC Eye) की एक विस्तृत रिपोर्ट से हुई, जिसने खुलासा किया कि मेटा के रिकमेंडेशन एल्गोरिदम कथित तौर पर ऐसे वीडियो को बढ़ावा दे रहे थे जिनमें बच्चों का यौन शोषण किया गया था। इस रिपोर्ट ने डिजिटल सुरक्षा और प्लेटफॉर्म की निगरानी प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। NCPCR ने इस मामले का स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए मेटा से स्पष्टीकरण मांगा था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला केवल तकनीकी खामी का नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट जवाबदेही का है। जब दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स विज्ञापनों के माध्यम से ऐसे संवेदनशील और अवैध कंटेंट को अनुमति देते हैं, तो यह करोड़ों बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालता है। यह घटना दर्शाती है कि एआई-आधारित मॉडरेशन सिस्टम अभी भी मानवीय गरिमा और कानूनी सीमाओं को समझने में विफल रहे हैं।
डिजिटल युग में एल्गोरिदम की लापरवाही केवल एक बग नहीं, बल्कि एक गंभीर सुरक्षा चूक है जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन करती है।
भारत सरकार का रुख इस मामले में अत्यंत सख्त रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इंस्टाग्राम को आदेश दिया कि वह ऐसे सभी विज्ञापनों और सामग्री को तुरंत हटाए जो बाल शोषण को बढ़ावा देते हैं। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए मंत्रालय के अधिकारियों को मेटा को तलब करने का निर्देश दिया था।
जांच में यह भी पाया गया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे शब्दों वाले पेड विज्ञापन चल रहे थे। ये विज्ञापन उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम चैनलों पर ले जा रहे थे, जहां ऐसी अवैध सामग्री बेची जा रही थी। यह मेटा की अपनी विज्ञापन नीतियों का खुला उल्लंघन है, जो नग्नता और यौन स्पष्ट सामग्री को प्रतिबंधित करती हैं।
| पक्ष | आरोप/कार्रवाई | मुख्य चिंता |
|---|---|---|
| BBC रिपोर्ट | एल्गोरिदम द्वारा CSAM का प्रचार | सुरक्षा प्रणालियों में गंभीर खामियां |
| NCPCR | वरिष्ठ अधिकारियों को समन | बाल अधिकारों का उल्लंघन |
| भारत सरकार | सख्त नोटिस और सामग्री हटाने का आदेश | कानूनी अनुपालन और सुरक्षा |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मेटा अधिकारियों को NCPCR के सामने क्यों बुलाया गया?
उत्तर: फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और विज्ञापनों के प्रसार के आरोपों की जांच के लिए उन्हें बुलाया गया है।
प्रश्न 2: इस मामले में भारत सरकार की क्या भूमिका है?
उत्तर: आईटी मंत्रालय ने मेटा को सख्त नोटिस जारी किया है और ऐसे सभी अवैध विज्ञापनों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है।