संगरूर के एक गरीब मजदूर ने अपने बेटे की नशे की लत और सरकार की विफलता पर वित्त मंत्री से सवाल पूछने के बाद आत्महत्या कर ली। यह घटना पंजाब में गहराते नशे के संकट और प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करती है।
- संगरूर के तूर बंजारा गांव के 53 वर्षीय मजदूर गुलजार सिंह ने कथित तौर पर आत्महत्या की।
- मृतक ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से गांव में नशे की उपलब्धता पर सवाल पूछे थे।
- परिवार का आरोप है कि मंत्री से सवाल पूछने के बाद उन्हें अपमानित किया गया और माफी मांगने पर मजबूर किया गया।
- पुलिस ने सरपंच और उनके पति सहित पांच लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
पंजाब के संगरूर जिले के तूर बंजारा गांव की एक संकरी गली के अंत में स्थित एक दो कमरों का कच्चा घर आज पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बन गया है। गुलजार सिंह, जो एक खेतिहर मजदूर थे, ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। उनकी आत्महत्या का कारण केवल उनके बड़े बेटे की नशे की लत नहीं थी, बल्कि वह व्यवस्था की बेरुखी और सत्ता के अहंकार से टूटे हुए थे।
घटनाक्रम के अनुसार, जब पंजाब के वित्त मंत्री और दिरबा के विधायक हरपाल सिंह चीमा गांव के दौरे पर थे, तब गुलजार सिंह ने साहस जुटाकर उनसे पूछा कि सरकार युवाओं को नशे से बचाने के लिए वास्तव में क्या कर रही है। परिवार का आरोप है कि इस सवाल के बदले उन्हें सम्मान के बजाय अपमान मिला। उन्हें गांव के सरपंच के पति बलजीत सिंह से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया, जिससे आहत होकर उन्होंने जहर (सल्फास) खा लिया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this incident is not just a personal tragedy but a systemic failure. It highlights a dangerous trend where citizens are intimidated for questioning elected representatives about critical public health crises. When a father's desperation to save his son is met with humiliation rather than empathy, it reflects a breakdown in the democratic dialogue between the government and the marginalized sections of society.
गुलजार सिंह के परिवार की स्थिति हृदयविदारक है। उनका 26 वर्षीय बेटा नशे का इतना आदि हो चुका है कि उसने घर के बर्तन, एलपीजी सिलेंडर और यहां तक कि फसल के रूप में जमा किया गया सारा गेहूं भी बेच दिया। उसकी मां पाल कौर बताती हैं कि अब घर में किसी एक सदस्य का रहना जरूरी है, वरना बेटा घर का सामान चुराकर बेच देता है।
"पंजाब में नशे की उपलब्धता अब एक सामान्य वस्तु की तरह हो गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारिवारिक ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो रहा है।"
प्रशासनिक स्तर पर, इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एक एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है। सरकार ने मुआवजे के तौर पर मृतक के बेटे सहबाज सिंह को नौकरी देने का वादा किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या एक सरकारी नौकरी उन हजारों परिवारों के दर्द को कम कर पाएगी जो हर दिन इस 'सफेद जहर' से लड़ रहे हैं?
पंजाब सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल से अब तक हजारों किलो हेरोइन और अफीम जब्त की गई है, लेकिन विडंबना यह है कि सरकारी नशामुक्ति केंद्रों में भर्ती होने वालों की संख्या 2024 के 9,577 से बढ़कर 2025 में 25,290 हो गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि छापेमारी तो हो रही है, लेकिन नशे की जड़ें और गहरी होती जा रही हैं।
Frequently Asked Questions
1. गुलजार सिंह ने आत्महत्या क्यों की?
उन्होंने अपने बेटे की नशे की लत और गांव में ड्रग्स की आसान उपलब्धता पर वित्त मंत्री से सवाल पूछने के बाद हुए अपमान और मानसिक प्रताड़ना के कारण आत्महत्या की।
पुलिस ने सरपंच, उनके पति और पंचायत के कुछ सदस्यों सहित पांच लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है।