मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में एक महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। परिजनों का दावा है कि ब्रेन डेड महिला की नाक से कीड़े निकले, जिससे चिकित्सालय की स्वच्छता और देखभाल पर सवाल खड़े हो गए हैं।
- रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में इलाज के दौरान एक महिला की दुखद मृत्यु।
- परिजनों का आरोप है कि ICU में देखभाल की कमी के कारण मरीज की नाक में कीड़े पड़ गए।
- अस्पताल प्रशासन ने मरीज को 'ब्रेन डेड' बताया, जबकि परिजनों ने समय पर रेफर न करने का आरोप लगाया है।
- मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया है।
मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में एक सप्ताह से भर्ती एक महिला, अर्चना गुप्ता, की मौत के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की घोर लापरवाही के कारण मरीज की स्थिति इतनी दयनीय हो गई कि उसकी नाक से कीड़े निकलने लगे।
घटनाक्रम के अनुसार, सतना निवासी अर्चना गुप्ता का 30 अगस्त को एक स्कूटी दुर्घटना में एक्सीडेंट हुआ था, जिसके बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए रीवा के इस सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का दावा है कि भर्ती के समय अर्चना की स्थिति स्थिर थी, लेकिन पांच दिनों के भीतर उनकी हालत में अचानक गिरावट आई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this incident is not just a case of medical failure but a systemic collapse of hygiene protocols in Intensive Care Units (ICUs). When a patient in a sterile environment develops larval infestation (myiasis), it points to a complete absence of basic nursing care and sanitation, which is a fundamental right of every patient.
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने मरीज की बिगड़ती हालत देखी और उसे किसी निजी या बेहतर अस्पताल में ले जाने की अनुमति मांगी, तो डॉक्टरों ने उन्हें रेफर करने से मना कर दिया। इतना ही नहीं, जब परिजनों ने ICU के भीतर की स्थिति का वीडियो बनाने की कोशिश की, तो आरोप है कि ड्यूटी डॉक्टर ने उनका मोबाइल फोन जबरन जब्त कर लिया ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
"ICU में स्वच्छता का अभाव और नर्सिंग केयर की कमी किसी भी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, खासकर उन मरीजों के लिए जो स्वयं अपनी स्थिति बताने में असमर्थ हों।"
इस घटना ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले पर ट्वीट कर स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय करने की मांग की है। दबाव बढ़ने के बाद, सीएमओ डॉक्टर अलग प्रकाश ने बताया कि परिजनों की मांग पर शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया है ताकि मौत के वास्तविक कारणों और लापरवाही की पुष्टि हो सके।
अस्पताल प्रशासन की सफाई यह है कि महिला की स्थिति अत्यंत नाजुक थी और वह 'ब्रेन डेड' हो चुकी थी, हालांकि उसकी पल्स चल रही थी। लेकिन यह तर्क परिजनों के इस दावे को खारिज नहीं करता कि शरीर में कीड़े पड़ना इलाज की कमी नहीं बल्कि घोर उपेक्षा का परिणाम है।
Frequently Asked Questions
1. अर्चना गुप्ता को अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया था?
अर्चना गुप्ता का स्कूटी से एक्सीडेंट हुआ था, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था।
2. परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?
परिजनों का आरोप है कि मरीज की ठीक से देखभाल नहीं की गई, जिससे उसकी नाक में कीड़े पड़ गए और उन्हें मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करने की अनुमति नहीं दी गई।