सितंबर 11 के हमलों से महज 48 घंटे पहले, अल-कायदा ने तालिबान के सबसे बड़े दुश्मन अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी थी। इस साजिश का उद्देश्य अमेरिका पर हमले से पहले अफगानिस्तान में प्रतिरोध को पूरी तरह खत्म करना था।
- अहमद शाह मसूद की हत्या 9 सितंबर 2001 को एक आत्मघाती हमले में की गई थी।
- हमलावरों ने बेल्जियम के पत्रकारों का भेष धारण किया था और कैमरों में विस्फोटक छिपाए थे।
- इस हत्या का उद्देश्य 9/11 हमलों के बाद संभावित अमेरिकी हस्तक्षेप के खिलाफ प्रतिरोध को कमजोर करना था।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए भीषण हमलों से ठीक दो दिन पहले, अफगानिस्तान की धरती पर एक और बड़ी साजिश को अंजाम दिया गया था। अहमद शाह मसूद, जो उत्तरी गठबंधन (Northern Alliance) के नेता थे और तालिबान के सबसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी माने जाते थे, उनकी हत्या अल-कायदा के operatives द्वारा की गई थी।
मसूद की हत्या का तरीका बेहद शातिर था। 9 सितंबर 2001 को दो व्यक्ति पंजशीर घाटी में उनके कैंप में पहुंचे। उन्होंने खुद को बेल्जियम के टेलीविजन पत्रकारों के रूप में पेश किया था। सुरक्षा जांचों से बचते हुए, वे मसूद के करीब पहुंचने में सफल रहे। उनके पास मौजूद वीडियो कैमरों के भीतर घातक विस्फोटक छिपे हुए थे, जिन्हें मसूद से बातचीत के दौरान सक्रिय कर दिया गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this assassination was not a random act of terror but a strategic preemptive strike. Bin Laden knew that after the 9/11 attacks, the US would inevitably invade Afghanistan. By eliminating Massoud, Al-Qaeda aimed to decapitate the only organized military resistance capable of partnering with the US to overthrow the Taliban regime.
इस घटना ने तत्कालीन अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को गहरे सदमे में डाल दिया था। CIA अधिकारी गैरी बर्नत्सेन ने याद किया कि मसूद की मौत की खबर सुनकर उन्हें लगा कि उत्तरी गठबंधन का अंत हो गया है। हालांकि, CIA निदेशक जॉर्ज टेनेट का मानना था कि अन्य स्थानीय वॉर लॉर्ड्स के साथ संपर्क बनाए रखकर इस नुकसान की भरपाई की जा सकती थी।
"मसूद की हत्या ने 9/11 की पूर्व संध्या पर हमारे पूरे मिशन को खतरे में डाल दिया था, यदि हमारे पास अन्य विकल्प मौजूद न होते।"
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पाकिस्तान की भूमिका भी संदिग्ध रही। जॉर्ज टेनेट ने खुलासा किया कि 9 सितंबर को पाकिस्तानी खुफिया प्रमुख जनरल महमूद अहमद के साथ उनकी मुलाकात हुई थी, जिसमें महमूद ने मुल्ला उमर और तालिबान का बचाव किया था। यह दर्शाता है कि उस समय क्षेत्रीय शक्तियों और आतंकवादी संगठनों के बीच कितने गहरे संबंध थे।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: अहमद शाह मसूद कौन थे?
उत्तर: वह अफगानिस्तान के उत्तरी गठबंधन के सैन्य कमांडर थे और तालिबान के कट्टर विरोधी थे।
प्रश्न 2: हमलावरों ने मसूद को कैसे धोखा दिया?
उत्तर: हमलावरों ने बेल्जियम के पत्रकारों का फर्जी रूप धारण किया और कैमरों में बम छिपाकर अंदर प्रवेश किया।