बीजेपी नेता विनय सहस्रबुद्धे ने कहा है कि BRICS देश अब एक एकल महाशक्ति के वर्चस्व को नकार रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं।
- BRICS देश अमेरिकी डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती दे रहे हैं।
- भारत-रूस व्यापार में रुपया-रूबल तंत्र का उपयोग 'हेजेमोनिक' सोच के खिलाफ एक कदम है।
- BRICS अब दुनिया की लगभग 40% वैश्विक जीडीपी और 50% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है।
बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई के अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि BRICS देश एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था को खारिज कर रहे हैं जहाँ केवल एक महाशक्ति का शासन हो। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक संबंधों में अधिक विविधता की आवश्यकता है और किसी एक मुद्रा को वैश्विक व्यापार पर हावी नहीं होना चाहिए।
इंडिया टुडे BRICS राउंडटेबल 2026 के दौरान चर्चा करते हुए, सहस्रबुद्धे ने विशेष रूप से भारत-रूस व्यापार का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डॉलर से हटकर रुपया-रूबल तंत्र की ओर बढ़ना केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह वैश्विक संबंधों में वर्चस्ववादी सोच (Hegemonic Thinking) के खिलाफ एक व्यापक विद्रोह का हिस्सा है।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव केवल मुद्रा के बारे में नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक संप्रभुता के बारे में है। जब देश अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करते हैं, तो वे अमेरिकी प्रतिबंधों और डॉलर की अस्थिरता के प्रभाव को कम कर सकते हैं, जिससे एक बहु-ध्रुवीय विश्व (Multipolar World) का मार्ग प्रशस्त होता है।
“हम वैश्विक संबंधों में उस सोच का खंडन देख रहे हैं जहाँ एक देश महाशक्ति बन जाता है और बाकी सब उसकी बात सुनते हैं।"
सहस्रबुद्धे ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रत्येक देश की अपनी आकांक्षाएं हैं और वे वैश्विक राजनीति में अपनी उचित पहचान चाहते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में संघर्ष और व्यापार टैरिफ को लेकर तनाव ने वैश्विक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है।
चर्चा के दौरान BRICS के बढ़ते आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रभाव पर भी बात हुई। यह तथ्य कि BRICS दुनिया की 50% जनसंख्या, 40% वैश्विक जीडीपी और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है, इसे एक शक्तिशाली आर्थिक ब्लॉक बनाता है।
सहस्रबुद्धे ने 'मानचित्रकला के लोकतंत्रीकरण' (Democratisation of Cartography) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि कैसे ऐतिहासिक रूप से मर्केटर प्रोजेक्शन ने उत्तरी गोलार्ध को बड़ा दिखाया है, जबकि वास्तव में दक्षिणी गोलार्ध का क्षेत्रफल काफी अधिक है, जो वैश्विक धारणाओं में निहित पूर्वाग्रह को दर्शाता है।
| पैरामीटर | पारंपरिक व्यवस्था (Dollar-Centric) | BRICS दृष्टिकोण (Multipolar) |
|---|---|---|
| मुख्य मुद्रा | अमेरिकी डॉलर (USD) | स्थानीय मुद्राएं (Local Currencies) |
| शक्ति संरचना | एकल महाशक्ति (Unipolar) | विविध शक्तियां (Multipolar) |
| व्यापार नीति | पश्चिमी प्रभुत्व | पारस्परिक संप्रभुता |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: रुपया-रूबल तंत्र क्या है?
यह एक द्विपक्षीय व्यापार व्यवस्था है जिसमें भारत और रूस डॉलर के बजाय अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करते हैं।
प्रश्न 2: BRICS का वैश्विक अर्थव्यवस्था में कितना प्रभाव है?
BRICS वर्तमान में वैश्विक जीडीपी के लगभग 40% और दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।