पूर्व G20 शेरपा अमिताभ कांत ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि कैसे भारत वैश्विक संघर्षों के बीच अपनी अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की दिशा में अग्रसर है।

  • ब्रिक्स वैश्विक जनसंख्या का लगभग 49% और वैश्विक GDP का 40% प्रतिनिधित्व करता है।
  • भारत 2047 तक 'विकसित भारत' के तहत 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रख रहा है।
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और संरक्षणवाद वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं।

आज तक इंडिया टुडे ग्लोबल इवेंट के दौरान, पूर्व G20 शेरपा अमिताभ कांत ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत चर्चा की। कांत ने स्पष्ट किया कि यह शिखर सम्मेलन एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण समय में आयोजित हो रहा है, जहाँ यूरोप और पश्चिम एशिया में गंभीर संघर्ष जारी हैं। इन तनावों ने न केवल वैश्विक शांति को प्रभावित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं (supply chains) को भी पूरी तरह बाधित कर दिया है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि BRICS अब केवल एक समूह नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति का केंद्र है। दुनिया की लगभग 48 से 49 प्रतिशत जनसंख्या और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इस समूह के पास है। ऐसे में, सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाना न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक स्थिरता के लिए भी अनिवार्य हो गया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that India is strategically positioning itself as a bridge between the Global North and Global South. By maintaining a multi-aligned policy, India is ensuring that its growth trajectory toward a $30 trillion economy remains uninterrupted by geopolitical polarizations. The balance between importing fossil fuels for immediate energy security and investing in clean technology for future sustainability is a masterclass in pragmatic diplomacy.

"ब्रिक्स एक बहुत ही महत्वपूर्ण अनौपचारिक समूह है जिसे पश्चिम-विरोधी रुख अपनाने से बचना चाहिए और ग्लोबल साउथ के साथ तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।"

भारत की 'विकसित भारत 2047' की दृष्टि के तहत, देश अपनी निर्यात क्षमताओं को बढ़ाने और महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कांत ने उल्लेख किया कि चीन के साथ तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन यह भारत के रणनीतिक हितों के साथ संतुलित होना चाहिए।

ऐतिहासिक रूप से, ब्रिक्स की स्थापना उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच प्रदान करने के लिए की गई थी। समय के साथ, यह समूह पश्चिमी प्रभुत्व वाले वित्तीय संस्थानों (जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक) के विकल्प के रूप में उभरा है। वर्तमान में, संरक्षणवाद (protectionism) की बढ़ती प्रवृत्ति ने देशों को अपने आंतरिक बाजारों को मजबूत करने और नए व्यापारिक साझेदार खोजने के लिए मजबूर किया है।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स देशों का संयुक्त क्षेत्रफल दुनिया के कुल भूमि क्षेत्र का लगभग एक तिहाई हिस्सा कवर करता है, जो इसे प्राकृतिक संसाधनों का सबसे बड़ा भंडार बनाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ब्रिक्स का वैश्विक अर्थव्यवस्था में कितना योगदान है?
उत्तर: ब्रिक्स देश वैश्विक GDP के लगभग 40% और दुनिया की कुल जनसंख्या के लगभग 49% का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रश्न 2: 2047 तक भारत का आर्थिक लक्ष्य क्या है?
उत्तर: भारत 'विकसित भारत' पहल के तहत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रख रहा है।