दिल्ली की एक विशेष अदालत ने IRCTC घोटाले के मामले में आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' मानने से इनकार कर दिया।
- दिल्ली कोर्ट ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया।
- यह मामला पटना में प्राइम लैंड के बदले IRCTC होटल अनुबंध देने के कथित घोटाले से जुड़ा है।
- विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 'राजनीतिक प्रतिशोध' के तर्कों को खारिज किया।
- मामले में सात अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व के लिए एक बड़ा कानूनी झटका देते हुए, दिल्ली की एक विशेष अदालत ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया। यह आदेश प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा IRCTC घोटाले के संबंध में दर्ज मामले में आया है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए सात व्यक्तियों, जिनमें आरजेडी प्रमुख भी शामिल हैं, के खिलाफ "मजबूत संदेह" है। अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों द्वारा दिए गए इस तर्क को खारिज कर दिया कि यह जांच राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जांच की प्रकृति और समयक्रम राजनीतिक द्वेष से प्रेरित नहीं लगता।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह घटनाक्रम भ्रष्टाचार के साधारण आरोपों से आगे बढ़कर 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत अधिक गंभीर कानूनी दायरे में प्रवेश कर गया है। PMLA के तहत जमानत मिलना कठिन होता है और आरोपियों पर अपनी संपत्ति की वैधता साबित करने का भारी बोझ होता है। बिहार की राजनीति में आरजेडी की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए, यह कानूनी दबाव परिवार की राजनीतिक छवि और भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
सीबीआई के भ्रष्टाचार के आरोपों का ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों में बदलना यह दर्शाता है कि अब जांच एजेंसियों का ध्यान 'अपराध की कमाई' और उसे छिपाने वाली शेल कंपनियों पर है।
इस मामले की जड़ें 2004 की हैं, जब लालू प्रसाद यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री थे। सीबीआई की एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने रांची और पुरी के दो IRCTC होटलों के रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी को दिया था। इसके बदले में, उन्हें पटना में एक 'बेनामी' कंपनी के माध्यम से कीमती जमीन दी गई। यह बेनामी कंपनी पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता के नाम पर थी।
सीबीआई की इस एफआईआर के आधार पर, ईडी ने PMLA के तहत मामला दर्ज किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित तौर पर शेल कंपनियों के माध्यम से इस 'अपराध की कमाई' को कैसे घुमाया गया। इस मामले में विजय कोचर, विनय कोचर (सुजाता होटल्स के निदेशक) और तत्कालीन IRCTC प्रबंध निदेशक पी.के. गोयल जैसे नाम भी शामिल हैं।
| पहलू | सीबीआई केस (भ्रष्टाचार) | ईडी केस (मनी लॉन्ड्रिंग) |
|---|---|---|
| मुख्य फोकस | रिश्वत और पद का दुरुपयोग | 'अपराध की कमाई' की लॉन्ड्रिंग |
| मुख्य आरोप | जमीन के बदले होटल अनुबंध देना | शेल कंपनियों के जरिए पैसा छिपाना |
| कानूनी ढांचा | भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम | PMLA, 2002 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. IRCTC घोटाला क्या है?
यह एक कथित भ्रष्टाचार का मामला है जिसमें पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद पर आरोप है कि उन्होंने पटना में प्राइम लैंड के बदले सुजाता होटल्स को रखरखाव का ठेका दिया था।
2. ईडी मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपियों में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी प्रसाद यादव के साथ कुछ व्यावसायिक सहयोगी शामिल हैं।