इरोड के कदम्बुर क्षेत्र के किसानों ने बिजली की भारी किल्लत और सब-स्टेशन के निर्माण में हो रही देरी पर गहरा रोष व्यक्त किया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्य जल्द पूरा नहीं हुआ तो वे बड़े पैमाने पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

  • कदम्बुर पहाड़ी क्षेत्र में बिजली सब-स्टेशन के निर्माण में देरी से कृषि कार्य प्रभावित।
  • तमिलगा किसान संरक्षण संघ ने TNPDCL से काम में तेजी लाने की मांग की।
  • जंगली जानवरों द्वारा फसलों की बर्बादी और मुआवजे की कमी एक गंभीर मुद्दा।
  • सहकारी बैंकों से ऋण प्राप्त करने में किसानों को आ रही समस्याओं पर चर्चा।

तमिलनाडु के इरोड जिले के कदम्बुर पहाड़ी क्षेत्र में बिजली की गंभीर कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बुधवार को 'तमिलगा किसान संरक्षण संघ' की इरोड उत्तर जिला इकाई द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में, स्थानीय किसानों ने तमिलनाडु बिजली वितरण निगम लिमिटेड (TNPDCL) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। किसानों का आरोप है कि सब-स्टेशन के निर्माण में हो रही अनावश्यक देरी के कारण सिंचाई और अन्य कृषि गतिविधियों में भारी बाधा आ रही है।

बैठक में उपस्थित 60 से अधिक किसानों ने एक स्वर में मांग की कि TNPDCL इस परियोजना को प्राथमिकता दे और इसे जल्द से जल्द पूरा करे। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस दिशा में त्वरित कदम नहीं उठाए, तो वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों का सहारा लेंगे।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the delay in critical infrastructure like power sub-stations in hilly terrains often leads to a cycle of poverty for marginal farmers. When power instability hits, crop yields drop, and farmers become more vulnerable to debt. This situation in Kadambur is a microcosm of the larger struggle between rural infrastructure development and bureaucratic inefficiency in Tamil Nadu.

कृषि क्षेत्र में बिजली की निरंतर आपूर्ति केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि आधुनिक खेती की बुनियादी आवश्यकता है, जिसके बिना खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

बिजली संकट के अलावा, किसानों ने वन विभाग की लापरवाही पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि जंगली जानवर लगातार खेतों में घुसकर फसलों को तबाह कर रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि सुरक्षा खाइयों (protective trenches) की नियमित सफाई और रखरखाव किया जाए ताकि जानवरों का प्रवेश रोका जा सके। साथ ही, उन्होंने फसल नुकसान के लिए पारदर्शी और त्वरित मुआवजे की मांग की है।

बैठक के दौरान सहकारी बैंकों से ऋण प्राप्त करने में आने वाली जटिलताओं पर भी चर्चा हुई। किसानों का कहना है कि कागजी कार्रवाई और बैंकिंग बाधाओं के कारण उन्हें समय पर वित्तीय सहायता नहीं मिल पा रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और वे कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।

क्या आप जानते हैं?: तमिलनाडु भारत के उन अग्रणी राज्यों में से एक है जहाँ कृषि विद्युतीकरण की दर उच्च है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रिड स्थिरता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Frequently Asked Questions

1. किसान किस मुख्य समस्या को लेकर विरोध कर रहे हैं?
मुख्य समस्या कदम्बुर पहाड़ी क्षेत्र में बिजली सब-स्टेशन के निर्माण में देरी और उसके परिणामस्वरूप होने वाली बिजली की किल्लत है।

p>2. किसानों ने वन विभाग से क्या मांग की है?
किसानों ने जंगली जानवरों को रोकने के लिए सुरक्षा खाइयों के रखरखाव और फसल नुकसान के लिए उचित मुआवजे की मांग की है।