प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच उच्च स्तरीय वार्ता में भारत ने अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए रूस से महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की आपूर्ति पर जोर दिया है।
- भारत और रूस के बीच महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earths) की आपूर्ति पर सहमति।
- द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने की योजना।
- S-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) पर चर्चा।
- एआई (AI) और क्षेत्रीय विमानन बाजार में निवेश के नए अवसर।
भारत और रूस के बीच रणनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। हालिया उच्च स्तरीय वार्ता के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने न केवल पारंपरिक रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था के आधार 'क्रिटिकल मिनरल्स' पर भी विशेष ध्यान दिया। भारत अपनी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंडस्ट्री के लिए रूस की समृद्ध खनिज संपदा का लाभ उठाना चाहता है।
इस वार्ता का एक मुख्य केंद्र बिंदु द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty) को तेजी से आगे बढ़ाना रहा। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और रूसी अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में यह स्पष्ट किया गया कि व्यापारिक बाधाओं को दूर कर 100 बिलियन डॉलर के व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करना प्राथमिकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, चीन पर दुर्लभ खनिजों की निर्भरता कम करना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संप्रभुता के लिए अनिवार्य है। रूस के साथ यह साझेदारी भारत को अपनी सप्लाई चेन को विविधता प्रदान करने और 'मेक इन इंडिया' अभियान को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगी।
"रूस के साथ खनिज समझौता भारत के हरित ऊर्जा संक्रमण (Green Energy Transition) के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।"
रक्षा क्षेत्र में, चर्चाओं में S-400 वायु रक्षा प्रणाली की लंबित डिलीवरी और अगली पीढ़ी के छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास पर जोर दिया गया। इसके साथ ही, रूस भारत के क्षेत्रीय विमानन बाजार में अपनी पैठ बनाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान के लिए उत्सुक है।
ऐतिहासिक रूप से, भारत और रूस के संबंध शीत युद्ध के दौर से ही अटूट रहे हैं। जहाँ सोवियत संघ ने भारत के औद्योगिक आधार को खड़ा करने में मदद की, वहीं अब यह साझेदारी डिजिटल और हाई-टेक युग की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव केवल हथियारों की खरीद-फरोख्त से हटकर तकनीकी सह-निर्माण (Co-creation) की ओर है।
Frequently Asked Questions
1. भारत रूस से किन खनिजों की उम्मीद कर रहा है?
भारत मुख्य रूप से लिथियम, कोबाल्ट और अन्य दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की तलाश में है जो बैटरी और चिप निर्माण में उपयोग होते हैं।
2. 100 बिलियन डॉलर के व्यापार लक्ष्य का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि दोनों देश आयात-निर्यात को बढ़ाकर अपने व्यापारिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना चाहते हैं।