कर्नाटक पुलिस ने उन 12 उम्मीदवारों की पहचान की है जिन्होंने पशु चिकित्सक की नौकरी पाने के लिए रिश्वत दी थी। CID ने लीक पेपर और लग्जरी रिसॉर्ट्स के जरिए चलाए जा रहे एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
- नौकरी पाने के लिए रिश्वत देने वाले 12 उम्मीदवारों की पहचान की गई।
- पूर्व KPSC परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बिचौलिये बसवराज कन्नले गिरफ्तार।
- लगभग ₹10 करोड़ के लेन-देन का संदेह; ₹80 लाख का प्रमाण मिल चुका है।
- प्रश्न पत्र एक दिन पहले लीक किए गए और उम्मीदवारों को रिसॉर्ट्स में ट्रेनिंग दी गई।
कर्नाटक पुलिस और अपराध जांच विभाग (CID) ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की जांच में एक बड़ी सफलता हासिल की है। मुख्य आरोपियों से गहन पूछताछ के बाद, जांचकर्ताओं ने उन 12 उम्मीदवारों की पहचान की है जिन्होंने 8 और 9 जनवरी को आयोजित परीक्षा में नकल कराने के लिए भारी रकम का भुगतान किया था।
इस पूरे मामले के केंद्र में पूर्व KPSC परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बिचौलिये बसवराज कन्नले की गिरफ्तारी है। इन दोनों पर राज्य सरकार के लिए 400 पशु चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप है। CID ने कन्नले के बैंक खातों में ₹80 लाख के हस्तांतरण का पता लगाया है, हालांकि संदेह है कि कुल राशि ₹10 करोड़ तक हो सकती है, जिसमें प्रति उम्मीदवार ₹30 लाख से ₹80 लाख तक की वसूली की गई थी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह घोटाला राज्य की भर्ती मशीनरी की प्रणालीगत विफलता को दर्शाता है। जब परीक्षा नियंत्रक जैसे उच्च अधिकारी प्रश्न पत्र लीक करने में शामिल होते हैं, तो यह केवल एक परीक्षा से समझौता नहीं है, बल्कि सरकारी नियुक्तियों की पूरी योग्यता-आधारित प्रक्रिया पर से जनता का विश्वास कम करता है। एन्क्रिप्टेड संचार और लग्जरी रिसॉर्ट्स का उपयोग यह संकेत देता है कि यह कोई साधारण चूक नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक गिरोह था।
FIR के अनुसार, धोखाधड़ी तब सामने आई जब यह देखा गया कि 29 ऐसे उम्मीदवार, जिनका कॉलेज रिकॉर्ड खराब था, उन्होंने प्रवेश परीक्षा में 500 में से 450 से अधिक अंक प्राप्त किए। 400 रिक्तियों के लिए 1,400 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 329 का चयन किया गया। इस विसंगति ने डॉ. मंजुनाथ जैसे ईमानदार उम्मीदवारों का ध्यान खींचा, जिनकी शिकायत के बाद यह जांच शुरू हुई।
KPSC के उच्चतम स्तरों तक बिचौलियों की पैठ यह बताती है कि परीक्षा सुरक्षा प्रोटोकॉल में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है।
CID की जांच से पता चला कि यह ऑपरेशन बहुत सावधानी से नियोजित था। बेंगलुरु के आसपास के रिसॉर्ट्स, विशेष रूप से देवनहल्ली में, चयनित उम्मीदवारों को रखा गया था। उन्हें हस्तलिखित और मुद्रित दोनों प्रारूपों में प्रश्न पत्र दिए गए और बिचौलियों द्वारा उन्हें परीक्षा के लिए प्रशिक्षित किया गया। परीक्षा के दिन, बिचौलियों ने ही उन्हें रिसॉर्ट से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया।
मामले में अन्य उच्च अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आई है। निलंबित KPSC अध्यक्ष साहुकार एस शिवशंकरप्पा भी जांच के घेरे में हैं। उच्च न्यायालय और एक विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है, क्योंकि उनके और बिचौलियों के बीच संचार के प्रथम दृष्टया सबूत मिले हैं।
| विवरण | मानक प्रक्रिया | घोटाले वाली प्रक्रिया |
|---|---|---|
| पेपर एक्सेस | केंद्र पर सुरक्षित वितरण | 24 घंटे पहले लीक |
| तैयारी | स्व-अध्ययन/कोचिंग | रिसॉर्ट-आधारित गहन ट्रेनिंग |
| चयन का आधार | योग्यता/शैक्षणिक प्रदर्शन | भुगतान (₹30 लाख - ₹80 लाख) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: KPSC पशु चिकित्सा परीक्षा घोटाले की रिपोर्ट किसने की?
इस घोटाले का खुलासा डॉ. मंजुनाथ द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद हुआ, जो एक योग्य पशु चिकित्सक थे लेकिन उनका चयन नहीं हुआ था।
प्रश्न 2: इस घोटाले में रिसॉर्ट्स की क्या भूमिका थी?
बेंगलुरु के देवनहल्ली जैसे इलाकों में रिसॉर्ट्स का उपयोग गुप्त केंद्रों के रूप में किया गया, जहां उम्मीदवारों को रखा गया, लीक पेपर दिए गए और उन्हें प्रशिक्षित किया गया।