कोलकाता नगर निगम ने स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन पर 65 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। शहरवासियों ने केवल लाइसेंस निलंबन को अपर्याप्त बताते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
- कोलकाता नगर निगम ने दो दिनों के भीतर कुल 65 रेस्तरां और मिठाई की दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए।
- कार्रवाई का मुख्य कारण खाद्य सुरक्षा मानकों, स्वच्छता और गुणवत्ता नियमों का उल्लंघन पाया जाना है।
- प्रसिद्ध आउटलेट्स जैसे 'अरसालान' और 'बलराम মল্লিক और राधारमण মল্লিক' भी इस कार्रवाई की चपेट में आए हैं।
- नागरिकों ने FSSAI अधिनियम 2006 के तहत भारी जुर्माने और जेल की मांग की है।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ा अभियान चलाया गया है। कोलकाता नगर निगम (KMC) ने मंगलवार और बुधवार को दो चरणों में कड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 65 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। पहले दिन 40 और दूसरे दिन 25 और दुकानों पर गाज गिरी। नगर निगम आयुक्त स्मिता पांडे ने स्पष्ट किया कि ये प्रतिष्ठान स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा कानून की शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं।
नगर निगम का कहना है कि यह कदम इन दुकानों को अपनी कमियों को सुधारने का मौका देने के लिए उठाया गया है। यदि आगामी निरीक्षण में अधिकारी संतुष्ट पाए जाते हैं, तो निलंबन वापस ले लिया जाएगा। हालांकि, इस 'नरम' रुख पर आम जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का तर्क है कि जब बात सार्वजनिक स्वास्थ्य की हो, तो केवल लाइसेंस निलंबित करना पर्याप्त नहीं है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this crackdown reveals a systemic failure in the maintenance of hygiene standards even among high-end food brands in Kolkata. The public's demand for stricter penalties indicates a growing awareness of food safety rights and a lack of trust in mere 'warning-based' administrative actions.
खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) अधिनियम, 2006 के अनुसार, मिलावट या अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में भोजन बेचने पर 1 लाख से 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। गंभीर मामलों में, जहाँ मिलावट से मृत्यु हो जाए, धारा 59 के तहत 6 महीने से 7 साल तक की जेल हो सकती है। नागरिकों का कहना है कि नामी ब्रांड्स पर इन कठोर धाराओं को लागू किया जाना चाहिए ताकि अन्य प्रतिष्ठान भी सतर्क रहें।
खाद्य सुरक्षा केवल कागजी लाइसेंस तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह ग्राहकों के स्वास्थ्य के प्रति एक नैतिक जिम्मेदारी है।
इस अभियान के दौरान कई बड़े नामों ने अपनी सफाई पेश की है। प्रसिद्ध बिरयानी चेन अरसालान ने दावा किया कि उन्हें कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला, हालांकि उन्होंने सुधार के लिए कुछ आउटलेट्स बंद रखे हैं। वहीं, मिठाई विक्रेता बलराम মল্লিক और राधारमण মল্লিক के बीच ब्रांडिंग और मालिकाना हक को लेकर विवाद सामने आया है, जहाँ एक गुट ने नोटिस न मिलने का दावा किया है।
यह अभियान केवल कोलकाता तक सीमित नहीं रहा। हावड़ा, हुगली, बांकुड़ा और कूचबिहार जैसे जिलों में भी छापेमारी की गई। हुगली में 11 दुकानों के खिलाफ कार्रवाई हुई, जबकि कूचबिहार में एक मिठाई दुकान पर पनीर में मैदा मिलाने का गंभीर आरोप लगा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कोलकाता नगर निगम ने लाइसेंस क्यों निलंबित किए?
उत्तर: स्वच्छता की कमी और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन न करने के कारण यह कार्रवाई की गई है।
प्रश्न 2: क्या निलंबित लाइसेंस वापस मिल सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यदि प्रतिष्ठान अपनी कमियों को सुधार लेते हैं और अगले निरीक्षण में अधिकारी संतुष्ट होते हैं, तो लाइसेंस बहाल किए जा सकते हैं।