नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता तनवीर सादिक द्वारा कश्मीरियों की ऐतिहासिक गरीबी को लेकर दिए गए एक विवादित बयान ने NC, BJP और PDP के बीच एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

  • NC प्रवक्ता तनवीर सादिक ने दावा किया कि ऐतिहासिक गरीबी इतनी अधिक थी कि एक पूरे मोहल्ले में एक ही पाजामा साझा किया जाता था।
  • BJP और PDP ने इस टिप्पणी को कश्मीरियों की गरिमा का अपमान और शेख अब्दुल्ला का महिमामंडन बताया।
  • NC ने इस बयान का बचाव करते हुए इसे डोगरा शासन के दमनकारी इतिहास का संदर्भ बताया।

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में उस समय उबाल आ गया जब सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के प्रवक्ता, विधायक और मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला के करीबी सहयोगी तनवीर सादिक ने एक विवादास्पद बयान दिया। 8 सितंबर को NC के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की पुण्यतिथि के अवसर पर सादिक ने 1950 के दशक के भूमि सुधारों के प्रभाव को बताने की कोशिश की।

सादिक ने कहा, "हमारे बुजुर्ग कहते हैं कि कश्मीरियों के पास पहनने के लिए पाजामे नहीं थे और एक पाजामा पूरे मोहल्ले द्वारा साझा किया जाता था।" हालांकि उनका उद्देश्य शेख अब्दुल्ला द्वारा किए गए सुधारों की सराहना करना था, लेकिन इस टिप्पणी को विपक्षी दलों ने कश्मीरियों का अपमान मान लिया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि NC कश्मीरियों को "कपड़ों के बिना" दिखाकर केवल शेख अब्दुल्ला का महिमामंडन करना चाहती है। विरोध स्वरूप, BJP कार्यकर्ताओं ने सादिक के पुतले फूंके और कुछ जगहों पर बिना पाजामे वाले पुतले प्रदर्शित किए। BJP ने इसे "कश्मीर की गरिमा की कीमत पर NC का प्रोपेगेंडा" करार दिया। वहीं, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के नेता नईम अख्तर ने इस टिप्पणी को "सामंती सोच" बताते हुए कहा कि NC लोगों के सशक्तिकरण को केवल एक व्यक्ति और एक पार्टी की देन मानती है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कश्मीर के ऐतिहासिक विमर्श पर कब्जे की लड़ाई है। NC द्वारा क्षेत्र की प्रगति का पूरा श्रेय अब्दुल्ला परिवार को देने की कोशिश को विपक्षी दल एक राजनीतिक एकाधिकार के रूप में देख रहे हैं। यह घटना दर्शाती है कि घाटी में इतिहास की व्याख्या को किस तरह वर्तमान चुनावी लाभ के लिए हथियार बनाया जाता है।

"इस संदर्भ को एक रूपक (metaphor) के रूप में समझा जाना चाहिए, जिसका उपयोग अत्यधिक गरीबी और जमींदारी प्रथा से प्रभावित कृषि समाज की स्थिति का वर्णन करने के लिए किया जाता है।" - प्रो. गुल वानी, कश्मीर विश्वविद्यालय।

अपने बयान का बचाव करते हुए, तनवीर सादिक ने ब्रिटिश प्रशासक वॉल्टर लॉरेंस की पुस्तक 'द वैली ऑफ कश्मीर' का हवाला दिया। उन्होंने तर्क दिया कि डोगरा शासकों ने हवा के अलावा लगभग हर चीज पर कर लगाया था, यहाँ तक कि खतना तक पर टैक्स था, जिससे मुस्लिम किसान इतनी गरीबी में चले गए कि उन्हें एक ही कपड़े को साझा करना पड़ता था।

विवाद बढ़ता देख NC नेता सलमान सागर ने तनवीर सादिक की ओर से माफी मांगी और कहा कि उनका उद्देश्य लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। हालांकि, विपक्ष अब भी औपचारिक माफी की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, NC ने आरोप लगाया कि BJP यह मुद्दा इसलिए उठा रही है क्योंकि हाल ही में BJP कार्यकर्ताओं द्वारा एक महिला प्रदर्शनकारी के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आया था।

क्या आप जानते हैं?: वॉल्टर लॉरेंस की पुस्तक 'द वैली ऑफ कश्मीर' को इस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर औपनिवेशिक काल के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: BJP और PDP ने 'एक पाजामा' वाली टिप्पणी का विरोध क्यों किया?
उनका तर्क था कि कश्मीरियों को इतना गरीब बताना कि वे एक ही कपड़ा साझा करते थे, उनकी गरिमा का अपमान है और यह केवल शेख अब्दुल्ला की छवि चमकाने की कोशिश है।

प्रश्न 2: NC ने अपने बयान का बचाव कैसे किया?
NC ने कहा कि यह बयान डोगरा शासन के दौरान अत्यधिक गरीबी और दमनकारी कर प्रणाली का एक ऐतिहासिक संदर्भ था, जिसका प्रमाण पुराने रिकॉर्ड्स में मिलता है।