बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) ने विवादों के बाद अपने 34वें वार्षिक दीदीकरण समारोह के लिए 17 अक्टूबर की तारीख तय की है। यह निर्णय CJI और BCI प्रमुख के निमंत्रण को लेकर छात्रों के बीच हुए हंगामे के बाद लिया गया है।

  • NLSIU का 34वां वार्षिक दीदीकरण समारोह अब 17 अक्टूबर को आयोजित होगा।
  • सितंबर में प्रस्तावित कार्यक्रम को 'अपरिहार्य परिस्थितियों' का हवाला देते हुए रद्द कर दिया गया था।
  • विवाद की जड़ CJI सूर्यकांत और BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की भागीदारी को लेकर छात्रों का विरोध था।
  • छात्रों को डिग्री व्यक्तिगत रूप से या अनुपस्थिति (in absentia) में प्राप्त करने का विकल्प दिया गया है।

बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) ने अपने बहुप्रतीक्षित 34वें वार्षिक दीदीकरण समारोह के लिए नई तिथि की घोषणा कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुष्टि की है कि यह कार्यक्रम अब 17 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। यह कदम पिछले कई हफ्तों से चले आ रहे उस विवाद के बाद उठाया गया है, जिसने देश के शीर्ष कानूनी संस्थान के भीतर तनाव पैदा कर दिया था।

शुरुआत में, यह समारोह 12 सितंबर को निर्धारित था, लेकिन छात्रों और पूर्व छात्रों द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की उपस्थिति का विरोध करने के बाद इसे रद्द कर दिया गया था। उस समय, विश्वविद्यालय ने 'अपरिहार्य परिस्थितियों' का हवाला दिया था और घोषणा की थी कि छात्रों को उनकी डिग्रियां अनुपस्थिति में प्रदान की जाएंगी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this row is not just about a ceremony, but a reflection of growing student activism within premier legal institutions. The clash between academic freedom, student dissent, and the authority of the judiciary/regulatory bodies like the BCI highlights a systemic tension in legal education in India.

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि 17 अक्टूबर के आयोजन का प्रस्ताव कार्यकारी परिषद (Executive Council) की 107वीं बैठक और सामान्य परिषद (General Council) की 40वीं बैठक में चर्चा के बाद स्वीकृत किया गया है। गौरतलब है कि इन दोनों निकायों की अध्यक्षता स्वयं CJI ने अपनी चांसलर की क्षमता में की थी।

"The intersection of judicial authority and student dissent at NLSIU mirrors a broader national debate on the boundaries of institutional discipline versus democratic protest."

इस विवाद की जड़ें हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी से जुड़ी हैं, जहाँ छात्रों ने NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों पर CJI की टिप्पणियों के कारण उनके निमंत्रण का विरोध किया था। इसके बाद BCI ने NALSAR के स्नातकों के नामांकन को रोकने का आदेश दिया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद वापस ले लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि BCI के पास कानून के छात्रों को दंडित करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

NLSIU के मामले में, छात्रों ने CJI की उपस्थिति पर सहमति जताई थी, लेकिन BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा। अब विश्वविद्यालय छात्रों से एक फॉर्म के जरिए पूछेगा कि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना चाहते हैं या अनुपस्थिति में डिग्री लेना चाहते हैं।

क्या आप जानते हैं?: NLSIU भारत का पहला नेशनल लॉ स्कूल था, जिसकी स्थापना 1987 में कानूनी शिक्षा में क्रांति लाने के उद्देश्य से की गई थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: NLSIU ने सितंबर के दीदीकरण समारोह को क्यों रद्द किया था?
उत्तर: CJI और BCI प्रमुख के निमंत्रण को लेकर छात्रों और पूर्व छात्रों के विरोध के कारण इसे 'अपरिहार्य परिस्थितियों' का हवाला देकर रद्द किया गया था।

p>प्रश्न 2: क्या 17 अक्टूबर के समारोह में CJI शामिल होंगे?
उत्तर: विश्वविद्यालय ने अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है कि CJI समारोह का हिस्सा होंगे या नहीं।