नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व ने गिद्डलूर डिवीजन में बाघों की हालिया मौतों के बाद 20 एंटी-पोचिंग कैंप स्थापित कर और 100 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर सुरक्षा कड़ी कर दी है।

  • गिद्डलूर प्रोजेक्ट टाइगर डिवीजन में 20 एंटी-पोचिंग कैंपों (APCs) की स्थापना।
  • 24/7 गश्त के लिए 100 से अधिक प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों की तैनाती।
  • बुनियादी ढांचे और जनशक्ति की निगरानी के लिए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन।
  • राचेरला फॉरेस्ट बीट में सात शिकारियों की गिरफ्तारी और बाघ के अंगों की बरामदगी।

नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) के अधिकारियों ने अपने शीर्ष शिकारियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा उपायों को अत्यधिक तीव्र कर दिया है। पिछले महीने क्षेत्र में बाघों की मौतों की खबरों के बाद, गिद्डलूर प्रोजेक्ट टाइगर डिवीजन में 20 एंटी-पोचिंग कैंप (APCs) स्थापित किए गए हैं और 100 से अधिक प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

गिद्डलूर डिवीजन की डिप्टी डायरेक्टर निशा कुमारी ने बताया कि डिवीजन में पहले से 14 APCs मौजूद थे, और हाल ही में छह नए कैंप स्थापित किए गए हैं। प्रत्येक कैंप में पांच प्रशिक्षित गार्ड तैनात हैं, जो वन्यजीवों, विशेष रूप से बाघों के अवैध शिकार को रोकने के लिए दिन-रात जंगलों और वन्यजीव अभयारण्यों में गश्त कर रहे हैं।

यह कदम उस समय उठाया गया है जब क्षेत्र में वन्यजीव अपराध बढ़े हैं। राचेरला फॉरेस्ट बीट में बाघ के शव मिलने के महज 7-8 दिनों के भीतर, अधिकारियों ने सात शिकारियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से बाघ के पंजे और अंगों की हड्डियाँ बरामद की गईं, जो संगठित वन्यजीव तस्करी के खतरे को दर्शाता है। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में फॉरेस्ट बीट ऑफिसर के. लक्ष्मणनायक को निलंबित कर दिया गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि NSTR द्वारा केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय अब सक्रिय गश्त (Proactive Patrolling) की रणनीति अपनाना एक महत्वपूर्ण बदलाव है। बीट ऑफिसर का निलंबन यह स्पष्ट करता है कि अब केवल संसाधनों की तैनाती पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी अनिवार्य है। बाघों की आबादी को बचाने के लिए ऐसा सख्त प्रवर्तन ही एकमात्र रास्ता है।

टाइगर रिजर्व में नीति और सुरक्षा के बीच के अंतर को पाटने के लिए उच्च स्तरीय समिति की निगरानी और जमीनी जनशक्ति का एकीकरण आवश्यक है।

इसी बीच, 7 सितंबर 2026 को गिद्डलूर डिवीजन के तुरीमल्ला रेंज में एक तीन साल के नर बाघ का शव मिला। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार पोस्टमार्टम किया गया। जांच में पाया गया कि बाघ की मृत्यु प्राकृतिक थी और यह आपसी लड़ाई (infighting) के कारण हुई थी, जो जंगली जानवरों के बीच एक सामान्य घटना है।

फील्ड डायरेक्टर यशोदा बाई आर. के निर्देश पर एक चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति नए बेस कैंपों के बुनियादी ढांचे और आवश्यक जनशक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी ताकि वन सुरक्षा को और अधिक अभेद्य बनाया जा सके।

क्या आप जानते हैं?: नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व भारत के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में से एक है, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में फैला हुआ है।
मानदंड पिछली स्थिति वर्तमान स्थिति
एंटी-पोचिंग कैंप 14 20
सुरक्षा कर्मी सामान्य तैनाती 100+ प्रशिक्षित गार्ड
निगरानी आवृत्ति समय-समय पर 24/7 निरंतर गश्त

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: नए एंटी-पोचिंग कैंप क्यों स्थापित किए गए?
इन कैंपों को अवैध शिकार को रोकने और बाघों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्थापित किया गया है, खासकर राचेरला क्षेत्र में शिकारियों की गिरफ्तारी के बाद।

प्रश्न 2: क्या हाल ही में हुई बाघ की मौत शिकार के कारण हुई थी?
नहीं, तुरीमल्ला रेंज में मिले बाघ के पोस्टमार्टम से पता चला कि उसकी मृत्यु प्राकृतिक थी और यह आपसी लड़ाई के कारण हुई थी।