10 सितंबर 1986 की एक याद, जब प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी को रोकने के लिए सार्वजनिक लेखा समितियों (PAC) के ढांचे में बदलाव का आह्वान किया था।
- पीएम राजीव गांधी ने वित्तीय अनियमितताओं की जड़ पर प्रहार करने के लिए PAC अध्यक्षों का आह्वान किया।
- बॉम्बे और आगरा के बीच 8 किलो सोने के रहस्यमय ढंग से गायब होने की घटना ने सुरक्षा खामियों को उजागर किया।
- पंजाब में बड़े सुरक्षा अभियान चलाए गए और दिल्ली के लिए एक विशाल बिजली परियोजना का खाका तैयार किया गया।
10 सितंबर 1986 को, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा रुख अपनाया था। संसद और राज्य विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (PAC) के अध्यक्षों के सातवें सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केवल दोषियों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य को उन संरचनात्मक खामियों की पहचान करनी चाहिए जिनके कारण ये अपराध हुए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इस सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ और केंद्रीय वित्त मंत्री वी. पी. सिंह भी शामिल थे। गांधी ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग राष्ट्रीय विकास में एक बड़ी बाधा है और टैक्सपेयर्स के पैसे की रक्षा करने में PAC की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि 1986 की यह पहल भारतीय शासन में पारदर्शिता लाने का एक प्रारंभिक प्रयास था। केवल दंडात्मक कार्रवाई के बजाय 'खामियों को दूर करने' (plugging the loopholes) पर ध्यान केंद्रित करके, प्रशासन दंड की संस्कृति से निवारण की संस्कृति की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा था—जो आज के आधुनिक ऑडिटिंग मानकों का आधार बना।
स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हुए, प्रधानमंत्री ने एक चौंकाने वाले मामले का जिक्र किया जिसमें बॉम्बे और आगरा के बीच रेल परिवहन के लिए बुक किए गए 8 किलोग्राम सोने के रहस्यमय तरीके से गायब हो जाने की बात कही गई। यह घटना उन 'लीकेज' का एक ज्वलंत उदाहरण थी जिन्हें गांधी समाप्त करना चाहते थे।
1986 में प्रणालीगत ऑडिटिंग की ओर बढ़ा यह कदम समकालीन भारतीय प्रशासन में सार्वजनिक जवाबदेही के ढांचे की नींव बना।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के अलावा, उस दिन कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं भी हुईं। पंजाब में, डीजी जे एफ रेबेरियो के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने फिरोजपुर, कपूरथला और अमृतसर में आतंकवादियों के ठिकानों पर एक बड़ा तलाशी अभियान चलाया। साथ ही, ऊर्जा मंत्रालय ने दिल्ली की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए 1800 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी, जिसमें दादरी में एक सुपर थर्मल पावर स्टेशन शामिल था।
10 सितंबर 1986 की प्रमुख घटनाएं
| क्षेत्र | घटना/कार्यवाही | प्रमुख व्यक्ति |
|---|---|---|
| शासन | भ्रष्टाचार विरोधी PAC सम्मेलन | राजीव गांधी |
| सुरक्षा | पंजाब कॉम्बिंग ऑपरेशन | जे एफ रेबेरियो |
| इन्फ्रास्ट्रक्चर | दिल्ली पावर प्रोजेक्ट ब्लूप्रिंट | ऊर्जा मंत्रालय |
| अपराध | सोने की चोरी (बॉम्बे-आगरा) | भारतीय रेलवे |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PAC को पीएम राजीव गांधी के संबोधन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
मुख्य उद्देश्य केवल दोषियों को पकड़ने के बजाय उन प्रणालीगत खामियों की पहचान करना और उन्हें ठीक करना था जिनके कारण सरकारी धन का दुरुपयोग होता था।
1986 में घोषित दिल्ली बिजली परियोजना का पैमाना क्या था?
यह 1800 करोड़ रुपये की परियोजना थी जिसमें दादरी में एक सुपर थर्मल स्टेशन और 400-KV ट्रांसमिशन नेटवर्क शामिल था, जिसे आंशिक रूप से विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित किया गया था।