बेंगलुरु के जल निकायों में अनुपचारित सीवेज के बहाव को रोकने के लिए मंत्री रामलिंग रेड्डी ने KSPCB और BWSSB को सख्त निर्देश जारी किए हैं। निजी अपार्टमेंट्स और अस्पतालों में चल रहे एसटीपी की अब गहन जांच होगी।
- KSPCB अपार्टमेंट, अस्पतालों और वाणिज्यिक परिसरों के निजी एसटीपी की जांच करेगा।
- बेंगलुरु में वर्तमान में 1,215.5 MLD का ट्रीटमेंट गैप है।
- मानकों का पालन न करने वाले संयंत्रों को 30 दिनों का समय दिया गया है।
- पीन्या और जिगनी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।
वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री रामलिंग रेड्डी ने गुरुवार को कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) को बेंगलुरु के विभिन्न अपार्टमेंट, शैक्षणिक संस्थानों, वाणिज्यिक परिसरों, अस्पतालों और कार्यालय भवनों में संचालित निजी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निरीक्षण करने का आदेश दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये संयंत्र निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं या नहीं।
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब शहर के जल निकायों में अनुपचारित या आंशिक रूप से उपचारित सीवेज के बहाव को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। मंत्री ने बेंगलुरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (BWSSB) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सीवेज को उपचार और सुरक्षित निपटान के लिए सही ढंग से एसटीपी तक पहुंचाया जाए। इसके अतिरिक्त, तूफानी जल नालों (stormwater drains) में बहने वाले अपशिष्ट जल को रोकने के लिए लापता सीवर लाइनों को बिछाने और क्षतिग्रस्त मैनहोल्स की मरम्मत करने के निर्देश दिए गए हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that Bengaluru's rapid urbanization has outpaced its waste management infrastructure. The current reliance on private STPs, which often lack stringent oversight, has led to the degradation of the city's lakes. This crackdown signifies a shift toward accountability for private entities in urban environmental management.
प्रदूषण के खिलाफ इस मुहिम के तहत, मंत्री ने KSPCB और BWSSB को संयुक्त रूप से पीन्या और जिगनी जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा करने और वहां से निकलने वाले तरल और ठोस कचरे की जांच करने का निर्देश दिया है।
"The integration of decentralized STPs with strict regulatory monitoring is the only way to save Bengaluru's dying lakes from eutrophication."
शहर की सीवेज प्रबंधन क्षमता की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि बेंगलुरु प्रतिदिन लगभग 2,580 मिलियन लीटर (MLD) सीवेज उत्पन्न करता है, जबकि वर्तमान में 37 एसटीपी की क्षमता केवल 1,364.5 MLD है। इस प्रकार, शहर में 1,215.5 MLD का एक बड़ा ट्रीटमेंट गैप मौजूद है।
| विवरण | वर्तमान स्थिति | लक्ष्य/भविष्य |
|---|---|---|
| कुल सीवेज उत्पादन | 2,580 MLD | - |
| उपचार क्षमता | 1,364.5 MLD | ~2,572 MLD (प्रस्तावित) |
| ट्रीटमेंट गैप | 1,215.5 MLD | 8.5 MLD (अनुमानित) |
सरकार की योजना के अनुसार, दिसंबर 2026 तक 51 MLD क्षमता के सात एसटीपी पूरे किए जाएंगे, जिसके बाद 2027, 2028 और 2029 तक क्रमशः 413 MLD, 148 MLD और 535 MLD क्षमता वाले नए संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
मंत्री रेड्डी ने स्पष्ट किया कि सभी एसटीपी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और KSPCB के मानकों को पूरा करना होगा। जो संयंत्र इन मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें सुधार के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। साथ ही, BWSSB को अवैध सीवर कनेक्शनों की पहचान करने और निवासियों को उचित कनेक्शन प्रदान करने का काम सौंपा गया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: निजी एसटीपी के लिए समय सीमा क्या है?
उत्तर: जो निजी एसटीपी निर्धारित मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, उन्हें सुधार के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है।
प्रश्न 2: औद्योगिक क्षेत्रों में क्या कार्रवाई की जाएगी?
उत्तर: KSPCB और BWSSB संयुक्त रूप से पीन्या और जिगनी जैसे क्षेत्रों में तरल और ठोस कचरे का निरीक्षण करेंगे और प्रदूषण रोकने के लिए कार्रवाई करेंगे।