तमिलनाडु सरकार ने POCSO अधिनियम के तहत पीड़ितों की सहायता के लिए 'सपोर्ट पर्सन' के चयन और उनकी भूमिकाओं के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस पहल का उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया के दौरान बच्चों को मानसिक और प्रशासनिक संबल प्रदान करना है।

  • POCSO पीड़ितों के लिए विशेष 'सपोर्ट पर्सन' नियुक्त किए जाएंगे।
  • चयन के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष और पुलिस सत्यापन अनिवार्य है।
  • प्रत्येक केस के लिए 10,000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा।
  • सपोर्ट पर्सन का कार्यकाल 3 वर्ष होगा और वे अधिकतम 10 केस संभाल सकेंगे।

चेन्नई: तमिलनाडु के समाज कल्याण और महिला सशक्तिकरण विभाग ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के मामलों में पीड़ितों की सहायता के लिए 'सपोर्ट पर्सन' (सहायक व्यक्ति) के चयन और उनके कर्तव्यों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी लड़ाई के दौरान बच्चा और उसका परिवार अकेला महसूस न करे और उन्हें समय पर उचित मार्गदर्शन मिले।

इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) आवेदनों के माध्यम से सपोर्ट पर्सन का एक डेटाबेस और पूल तैयार करेगी। पात्रता मानदंडों के तहत, चिल्ड्रन्स होम या शेल्टर के अधिकारी, DCPU के कर्मचारी, या बाल अधिकार संगठनों में काम करने वाले व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं। चयन के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए।

चयन प्रक्रिया और समिति

DCPU हर साल सार्वजनिक विज्ञापन के माध्यम से आवेदन आमंत्रित करेगा। चयन प्रक्रिया में पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा, जिसके बाद उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया जाएगा। चयन समिति की अध्यक्षता जिला राजस्व अधिकारी (DRO) करेंगे, जिसमें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) के सदस्य, पुलिस अधीक्षक द्वारा नामित डीएसपी, जिला कलेक्टर द्वारा नामित एक अनुभवी सपोर्ट पर्सन और जिला बाल संरक्षण अधिकारी (संयोजक के रूप में) शामिल होंगे। अंतिम सूची जिला कलेक्टर द्वारा अनुमोदित की जाएगी और इसे पुलिस, CWC, न्यायपालिका और अभियोजकों के साथ साझा किया जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि POCSO जैसे संवेदनशील मामलों में कानूनी प्रक्रिया अक्सर बच्चों के लिए डरावनी और जटिल होती है। एक समर्पित सपोर्ट पर्सन न केवल प्रशासनिक बाधाओं को दूर करता है, बल्कि बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा भी करता है। यह प्रणाली न्याय वितरण में मानवीय दृष्टिकोण को जोड़ती है, जिससे पीड़ित बच्चे के पुनर्वास की संभावना बढ़ जाती है।

"कानूनी प्रक्रियाओं में बच्चों के लिए एक विश्वसनीय मध्यस्थ की उपस्थिति उनके मानसिक आघात को कम करने और गवाही के दौरान उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।"

कर्तव्य और जिम्मेदारियां

सपोर्ट पर्सन की भूमिका बहुआयामी होगी। उन्हें बच्चे और परिवार को जांच के चरणों और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी देनी होगी। साथ ही, वे यह सुनिश्चित करेंगे कि बच्चे को POCSO अधिनियम 2012 के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सहायता मिले। उन्हें सप्ताह में कम से कम एक बार बच्चे और परिवार के संपर्क में रहना होगा और केस में होने वाले किसी भी नए विकास की तुरंत सूचना देनी होगी।

इसके अतिरिक्त, सपोर्ट पर्सन को पुलिस, अदालत के अधिकारियों, DCPU और CWC के साथ बातचीत के दौरान बच्चे और परिवार के साथ रहना होगा। यदि बच्चे को किसी दुभाषिया, अनुवादक या विशेष शिक्षक की आवश्यकता है, तो सपोर्ट पर्सन उसके समन्वय का कार्य भी करेंगे।

क्या आप जानते हैं?: POCSO अधिनियम 2012 को विशेष रूप से बच्चों को यौन शोषण और उत्पीड़न से बचाने के लिए बनाया गया था, जिसमें बच्चे की गोपनीयता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सपोर्ट पर्सन को कितना मानदेय मिलेगा?
उत्तर: प्रत्येक केस के लिए सपोर्ट पर्सन को 10,000 रुपये का मानदेय चार किस्तों में दिया जाएगा।

प्रश्न 2: एक सपोर्ट पर्सन एक समय में कितने केस संभाल सकता है?
उत्तर: एक सपोर्ट पर्सन एक समय में अधिकतम 10 मामलों को संभालने के लिए पात्र होगा।