नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने BRICS राउंडटेबल में जोर दिया कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और 'विकसित भारत' के लक्ष्य के लिए चीन की क्लीन टेक्नोलॉजी विशेषज्ञता का लाभ उठाना होगा।

  • क्लीन टेक के प्रमुख क्षेत्रों (बैटरी, EV, सोलर) में चीन का वैश्विक एकाधिकार है।
  • भारत को ऊर्जा संक्रमण के लिए व्यावहारिक कूटनीति अपनाकर चीन के साथ तकनीकी साझेदारी करनी होगी।
  • भारत का लक्ष्य केवल डिजाइनिंग नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है।

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे के BRICS Roundtable के दौरान, नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की औद्योगिक रणनीति पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, भारत को अमेरिका और चीन दोनों के साथ एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना होगा ताकि राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जा सके।

क्लीन टेक्नोलॉजी: चीन का दबदबा और भारत की चुनौती

अमिताभ कांत ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि क्लीन टेक्नोलॉजी के लगभग सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चीन का पूर्ण नियंत्रण है। वर्तमान में दुनिया की लगभग 95% क्लीन बैटरियां और 85% इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) चीन में निर्मित होते हैं। इसके अतिरिक्त, सोलर सेक्टर पर 80% और विंड एनर्जी पर 77% नियंत्रण चीन का है, जो भारत के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के लिए एक बड़ी चुनौती है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that India's heavy reliance on fossil fuel imports, costing nearly $180 billion annually, makes it vulnerable to West Asian tensions. To decouple from this volatility, transitioning to green energy is not just an environmental choice but a strategic economic necessity. However, doing so without leveraging China's existing tech maturity could significantly slow down India's progress.

"भारत को चीन के साथ तकनीकी स्तर पर सहभागिता बनानी होगी, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि चीन इस तकनीक को 'वेपनाइज' (हथियार) न बनाए।"

बाजार की असमानता और गैर-टैरिफ बाधाएं

कांत ने चीन की व्यापारिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि चीन का ध्यान केवल निर्यात पर है, जबकि वह अपने घरेलू बाजार को दूसरे देशों के लिए नहीं खोलता। नॉन-टैरिफ बैरियर्स के कारण भारतीय फार्मास्यूटिकल और ड्रग मैन्युफैक्चरर्स को चीन में प्रवेश करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में भारत को इस मुद्दे को मजबूती से उठाना चाहिए।

भारत की नई औद्योगिक क्रांति

भारत अब केवल चिप डिजाइनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि सेमीकंडक्टर PLI योजना के माध्यम से मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रहा है। स्पेस, डेटा सेंटर, एयरोस्पेस और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी और स्टार्टअप्स के आने से एक नई औद्योगिक लहर शुरू हुई है। भारत का लक्ष्य अब घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा बनना है।

क्षेत्र चीन का नियंत्रण (%) भारत की स्थिति/लक्ष्य
क्लीन बैटरियां ~95% PLI के माध्यम से घरेलू उत्पादन
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स ~85% EV एडॉप्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार
सोलर एनर्जी ~80% सोलर पार्क और आयात निर्भरता कम करना
क्या आप जानते हैं?: BRICS देश वर्तमान में दुनिया की कुल वैश्विक जीडीपी (GDP) का लगभग 40% हिस्सा नियंत्रित करते हैं, जो इसे एक शक्तिशाली आर्थिक ब्लॉक बनाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: भारत को चीन के साथ काम करने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: क्योंकि क्लीन टेक, बैटरी और सोलर एनर्जी में चीन का वैश्विक एकाधिकार है, जिसके बिना भारत का ऊर्जा संक्रमण धीमा हो सकता है।

प्रश्न 2: BRICS में भारत की क्या भूमिका होनी चाहिए?
उत्तर: भारत को राजनीतिक ध्रुवीकरण के बजाय व्यापार, निवेश और जलवायु जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर आम सहमति बनाने वाली भूमिका निभानी चाहिए।