तेलंगाना राज्य अभिलेखागार और ईरान के नूर इंटरनेशनल माइक्रोफिल्म सेंटर के सहयोग से 17 लाख ऐतिहासिक फारसी पृष्ठों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया गया है, जो दक्कन के इतिहास पर शोध के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
- 17 लाख फारसी अभिलेख पृष्ठों का डिजिटलीकरण पूरा हुआ।
- 4.7 लाख महत्वपूर्ण दस्तावेजों का संरक्षण (Conservation) किया गया।
- यह परियोजना तेलंगाना राज्य अभिलेखागार (TGSARI) और ईरान के नूर इंटरनेशनल माइक्रोफिल्म सेंटर (NIMC) का संयुक्त प्रयास है।
हैदराबाद में इतिहास के संरक्षण की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए, तेलंगाना राज्य अभिलेखागार और अनुसंधान संस्थान (TGSARI) ने ईरान के सांस्कृतिक दूतावास से संबद्ध नूर इंटरनेशनल माइक्रोफिल्म सेंटर (NIMC) के साथ मिलकर 17 लाख फारसी अभिलेख पृष्ठों का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है। इस व्यापक परियोजना के तहत न केवल डिजिटलीकरण किया गया, बल्कि लगभग 4.7 लाख फारसी दस्तावेजों का भौतिक संरक्षण भी किया गया है ताकि उन्हें समय की मार से बचाया जा सके।
परियोजना के नवीनतम चरण में, 3,08,122 फारसी दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां तेलंगाना राज्य अभिलेखागार को सौंपी गईं। इनमें पांडुलिपियों और 'अवरजाह' (प्रशासनिक या राजस्व रिकॉर्ड) के साथ-साथ शाहजहाँ के काल के अंग्रेजी कैटलॉग के पांच खंड शामिल हैं। यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ईरान के राष्ट्रपति की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत यात्रा के समय संपन्न हुई है, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं बल्कि दक्कन के भूले-बिसरे इतिहास को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। फारसी भाषा सदियों तक दक्षिण एशिया में प्रशासन और संस्कृति की भाषा रही है। इन दस्तावेजों का डिजिटलीकरण शोधकर्ताओं के लिए उन रहस्यों को खोल देगा जो अब तक केवल भौतिक फाइलों में कैद थे।
डिजिटलीकरण के माध्यम से हम न केवल कागज बचा रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी डिजिटल विरासत छोड़ रहे हैं जिसे दुनिया के किसी भी कोने से एक्सेस किया जा सकेगा।
TGSARI की निदेशक ज़रीना परवीन ने बताया कि संस्थान के पास लगभग 4.3 करोड़ ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिनमें से 3.3 करोड़ अकेले फारसी भाषा में हैं। इनमें बहमनी, आदिल शाही, कुतुब शाही, मुगल और आसफ जाही काल के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड शामिल हैं। उन्होंने NIMC की विशेषज्ञता की सराहना करते हुए कहा कि कई दस्तावेज अलंकृत फारसी में हैं, जिन्हें संरक्षित करना एक कठिन चुनौती थी।
इस सहयोग की शुरुआत 2022 में एक समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से हुई थी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक फारसी रिकॉर्ड की पहचान, संरक्षण, बहाली, कैटलॉगिंग और डिजिटलीकरण करना था। वर्तमान में, नूर इंटरनेशनल माइक्रोफिल्म सेंटर को शेष कार्य पूरा करने के लिए तीन महीने की अतिरिक्त समय सीमा दी गई है।
दस्तावेजों का विवरण
| विवरण | संख्या/विवरण |
|---|---|
| कुल डिजिटलाइज्ड पृष्ठ | 17 लाख |
| संरक्षित दस्तावेज | 4.7 लाख |
| नवीनतम हैंडओवर | 3,08,122 दस्तावेज |
| कुल फारसी संग्रह | 3.3 करोड़ |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस परियोजना में ईरान की क्या भूमिका थी?
उत्तर: ईरान के सांस्कृतिक दूतावास से संबद्ध नूर इंटरनेशनल माइक्रोफिल्म सेंटर (NIMC) ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से दस्तावेजों के संरक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य किया।
प्रश्न 2: ये दस्तावेज किन राजवंशों के इतिहास पर प्रकाश डालते हैं?
उत्तर: ये दस्तावेज बहमनी, आदिल शाही, कुतुब शाही, मुगल और आसफ जाही काल के प्रशासनिक और सांस्कृतिक इतिहास को कवर करते हैं।