आंध्र प्रदेश रयतु संघ ने विशाखापत्तनम के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में फसल नुकसान झेल रहे किसानों के लिए ₹50,000 प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता और कर्ज माफी की मांग की है।

  • सूखाग्रस्त मंडलों के किसानों के लिए ₹50,000 प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता की मांग।
  • मौजूदा फसल ऋणों की पूर्ण माफी और फसल बीमा राशि के तत्काल भुगतान का आग्रह।
  • पशुओं के लिए मुफ्त चारे की आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील।

विजयनगरम जिले में सूखे की भीषण मार झेल रहे किसानों की आवाज अब सरकार तक पहुँचने लगी है। आंध्र प्रदेश रयतु संघ के जिला संयोजक उल्लाकुइला नीलकंठेश्वर यादव ने राज्य सरकार से एक पुरजोर अपील की है कि खरीफ सीजन के दौरान निवेश गंवाने वाले किसानों को तत्काल राहत प्रदान की जाए। शुक्रवार को राजम में मंडल तहसीलदार राजशेखर को एक ज्ञापन सौंपते हुए संघ ने अपनी मांगों को स्पष्ट किया।

रयतु संघ के अनुसार, जिले के कई मंडल सूखे की चपेट में हैं, जिससे फसलों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है। किसानों ने अपनी जमा-पूंजी और ऋण लेकर खेती की थी, लेकिन बारिश की कमी के कारण पूरी मेहनत पर पानी फिर गया है। ऐसे में ₹50,000 प्रति एकड़ की सहायता राशि उन्हें फिर से खड़ा होने में मदद करेगी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर आर्थिक संकट बन चुका है। जब छोटे किसान कर्ज के जाल में फंसते हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है। सरकार द्वारा समय पर सहायता न मिलना किसानों को और अधिक मानसिक तनाव की ओर धकेल सकता है।

कृषि संकट केवल बारिश की कमी नहीं, बल्कि समय पर मिलने वाली सरकारी सहायता और बीमा दावों के अभाव का परिणाम है।

ज्ञापन में केवल वित्तीय सहायता की ही नहीं, बल्कि व्यापक राहत पैकेज की मांग की गई है। श्री यादव ने जोर देकर कहा कि सरकार को न केवल नए अनुदान देने चाहिए, बल्कि पुराने फसल ऋणों को माफ करना चाहिए ताकि किसान अगली फसल के लिए साहस जुटा सकें। इसके साथ ही, फसल बीमा योजनाओं के तहत लंबित भुगतानों को जल्द से जल्द निपटाने की मांग की गई है।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा पशुपालन का है। फसलों की बर्बादी के कारण चारे का भारी संकट पैदा हो गया है। रयतु संघ ने मांग की है कि पशुओं के लिए मुफ्त चारे की व्यवस्था की जाए, क्योंकि पशु ही किसानों की आय का वैकल्पिक स्रोत होते हैं और उनके बिना ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।

क्या आप जानते हैं?: भारत के कई राज्यों में फसल बीमा योजना (PMFBY) लागू है, लेकिन प्रशासनिक जटिलताओं के कारण वास्तविक लाभ मिलने में अक्सर महीनों लग जाते हैं।

Frequently Asked Questions

1. रयतु संघ ने प्रति एकड़ कितनी सहायता मांगी है?
संघ ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों के लिए ₹50,000 प्रति एकड़ की मांग की है।

2. ज्ञापन में वित्तीय सहायता के अलावा और क्या मांगें शामिल थीं?
मुख्य मांगों में फसल ऋण माफी, फसल बीमा का भुगतान और पशुओं के लिए मुफ्त चारा शामिल है।