भारत 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जहाँ राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग सहित दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेता जुटेंगे। यह सम्मेलन वैश्विक शासन और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के भविष्य को निर्धारित करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • भारत 12-13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
  • ब्लॉक का विस्तार अब 11 पूर्ण सदस्यों और 10 भागीदार देशों तक हो गया है।
  • भारत का मुख्य फोकस लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation) और व्यावहारिक सहयोग पर है।
  • वैश्विक जनसंख्या का लगभग 49.5% हिस्सा अब ब्रिक्स के दायरे में आता है।

भारत की राजधानी नई दिल्ली इस समय एक किले में तब्दील हो चुकी है। सड़कों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है, क्योंकि दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं का आगमन होने वाला है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उपस्थिति ने इस आयोजन को उच्च-दांव वाली कूटनीति के केंद्र में खड़ा कर दिया है।

ब्रिक्स (BRICS) अब केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह नहीं रह गया है। 2024 और 2025 के विस्तार के बाद, जिसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हुए हैं, यह संगठन अब दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। भारत के लिए यह अपनी नेतृत्व क्षमता दिखाने और वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बनने का एक सुनहरा अवसर है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन केवल औपचारिक बैठकों के बारे में नहीं है, बल्कि यह इस बात की परीक्षा है कि क्या भारत परस्पर विरोधी हितों वाले देशों (जैसे ईरान और यूएई) के बीच आम सहमति बना सकता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव के बीच, भारत का दृष्टिकोण 'व्यावहारिक सहयोग' पर आधारित है, जो इसे पश्चिम और पूर्व के बीच एक सेतु के रूप में स्थापित करता है।

"ब्रिक्स का विस्तार इसकी ताकत भी है और चुनौती भी; आम सहमति बनाना अब पहले से कहीं अधिक कठिन लेकिन आवश्यक हो गया है।"

भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान चार मुख्य स्तंभों पर जोर दिया है। इनमें सबसे प्रमुख है 'लचीलापन' (Resilience), जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा में सुधार करना है ताकि भविष्य के किसी भी वैश्विक संकट का सामना किया जा सके। दूसरा स्तंभ 'नवाचार' (Innovation) है, जहाँ भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और फिनटेक मॉडल को दुनिया के सामने पेश कर रहा है।

ऐतिहासिक रूप से, ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन (BRIC) के साथ हुई थी, जिसमें 2010 में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ। आज यह समूह आईएमएफ (IMF) और विश्व बैंक जैसे संस्थानों में विकासशील देशों के अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहा है।

विशेषता प्रारंभिक ब्रिक्स (2009) वर्तमान ब्रिक्स (2026)
सदस्य संख्या 4 सदस्य 11 पूर्ण सदस्य + 10 भागीदार
जनसंख्या प्रतिनिधित्व सीमित विश्व की लगभग 49.5% आबादी
मुख्य फोकस आर्थिक सहयोग डिजिटल इंफ्रा, ऊर्जा और वैश्विक शासन
क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स की शुरुआत मूल रूप से 'BRIC' के रूप में हुई थी, जिसे गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नी ने एक निवेश शब्द के रूप में गढ़ा था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ब्रिक्स में हाल ही में कौन से नए देश शामिल हुए हैं?
उत्तर: 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और सऊदी अरब शामिल हुए, और 2025 में इंडोनेशिया इस समूह का हिस्सा बना।

प्रश्न 2: भारत के लिए इस शिखर सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर: भारत का उद्देश्य डिजिटल बुनियादी ढांचे, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा लचीलेपन के माध्यम से व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देना है।