18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर नई दिल्ली को हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में बदल दिया गया है। 15,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
- मध्य दिल्ली में 15,000 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियां तैनात।
- भ्रामक जानकारी और सुरक्षा खतरों को रोकने के लिए सोशल मीडिया की रियल-टाइम निगरानी।
- 35 से अधिक सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्जन; मेट्रो सेवाएं सुबह 6 बजे से शुरू होंगी।
- चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा के विरोध में तिब्बती समुदाय का प्रदर्शन।
12 और 13 सितंबर, 2026 को होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से पहले मध्य दिल्ली को पूरी तरह से एक किले में बदल दिया गया है। सुरक्षा का स्तर अभूतपूर्व है, जिसमें 15,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की 200 कंपनियों को तैनात किया गया है, ताकि भारत मंडपम में आने वाले ग्यारह देशों के राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुरक्षा के इंतजाम केवल भौतिक चौकियों तक सीमित नहीं हैं। दिल्ली पुलिस ने एक डिजिटल जाल बिछाया है, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की गहन निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे या गलत सूचना (misinformation) को समय रहते रोका जा सके। इसके अलावा, यमुना नदी में नावों के जरिए गश्त की गई, जिसका नेतृत्व डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने किया। लाल किला और राजघाट जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, सुरक्षा के ये कड़े उपाय 2026 शिखर सम्मेलन के उच्च भू-राजनीतिक महत्व को दर्शाते हैं। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की मेजबानी करना एक बड़ी चुनौती है, जहाँ शहरी व्यवस्था और पूर्ण सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। इतनी बड़ी सैन्य तैनाती भारत के 'जीरो-फेल्योर' सुरक्षा प्रोटोकॉल के संकल्प को दिखाती है।
डिजिटल निगरानी और भौतिक किलेबंदी का यह संगम भारत में वैश्विक सम्मेलनों के लिए 'स्मार्ट सिक्योरिटी' के एक नए युग की शुरुआत है।
लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर, शहर में काफी बदलाव किए गए हैं। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 35 से अधिक सड़कों पर प्रतिबंध लगाया है और 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए हैं। हालांकि, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने यात्रियों और छात्रों की सुविधा के लिए रविवार को मेट्रो सेवाएं सुबह 6 बजे से शुरू करने का निर्णय लिया है। मोटर चालकों को सलाह दी गई है कि वे नियंत्रित सड़कों के 200 मीटर के भीतर पार्किंग न करें।
साथ ही, राजधानी का सौंदर्यकरण भी किया गया है। नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने पटेल चौक, तीन मूर्ति और मंडी हाउस सहित 17 प्रमुख चौराहों और 11 होटलों को विशेष लाइटिंग और फूलों से सजाया है, ताकि विदेशी मेहमानों के सामने भारत की भव्यता प्रदर्शित हो सके।
हालांकि, इस आयोजन के बीच विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले। तिब्बती युवा कांग्रेस के बैनर तले मजनू का टीला इलाके में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा का विरोध किया गया। यह राष्ट्रपति जिनपिंग की सात साल बाद भारत की पहली यात्रा है। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया, जो प्रगति मैदान के पास झंडे लहरा रहे थे।
| सुरक्षा स्तर | किए गए उपाय | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| जमीनी बल | 15k पुलिस + 200 पैरा-मिल कंपनियां | VVIPs की भौतिक सुरक्षा |
| डिजिटल | सोशल मीडिया ट्रैकिंग | अफवाहों और खतरों को रोकना |
| जल/वायु | यमुना गश्त और हवाई स्कैनिंग | अनाधिकृत प्रवेश रोकना |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: दिल्ली के किन इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन सबसे अधिक है?
पटेल चौक, तीन मूर्ति और भारत मंडपम के आसपास की सड़कें सबसे अधिक प्रभावित हैं।
प्रश्न 2: क्या शिखर सम्मेलन के दौरान मेट्रो चलेगी?
हाँ, मेट्रो सेवाएं पूरी तरह चालू रहेंगी और रविवार को सुबह 6 बजे से शुरू होंगी।