प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती घोटाले की जांच तेज कर दी है, जिसके तहत निलंबित IAS अधिकारी और एक कथित बिचौलिए से जेल के भीतर पूछताछ की गई।

  • ED ने निलंबित IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बिचौलिए बसवराज कन्नाले से पूछताछ की।
  • यह मामला पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में हुए भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
  • KPSC सदस्य शांता होसमणि की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज की; वह फिलहाल फरार हैं।

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती घोटाले की जांच में एक बड़ा मोड़ आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को निलंबित IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और कथित बिचौलिए बसवराज कन्नाले से कड़ी पूछताछ की। ये दोनों आरोपी वर्तमान में परप्पणा अग्रहारा केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। 51वीं सिटी सिविल और सत्र न्यायालय द्वारा विशेष अनुमति मिलने के बाद ED की टीम ने जेल के भीतर ही उनसे पूछताछ की।

यह पूरा मामला पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में हुए कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है। विधान सौधा पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बाद, ED ने KPSC कार्यालय और श्री गंगवार से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी। गौरतलब है कि भर्ती परीक्षा के दौरान गंगवार KPSC के परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examinations) थे। इससे पहले, अपराध जांच विभाग (CID) ने 30 अगस्त को गंगवार और अगले दिन बसवराज कन्नाले को गिरफ्तार किया था।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला राज्य स्तर के भर्ती निकायों में मौजूद गंभीर खामियों को उजागर करता है। जब परीक्षा नियंत्रक जैसे उच्च पदस्थ अधिकारी ही रिश्वतखोरी और बिचौलियों के जाल में फंस जाते हैं, तो सरकारी नियुक्तियों की योग्यता और निष्पक्षता पर जनता का विश्वास कम हो जाता है। CID और ED की संयुक्त जांच यह संकेत देती है कि इस भर्ती घोटाले के पीछे धन शोधन (Money Laundering) का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

"परीक्षाओं के शीर्ष पर बैठे एक IAS अधिकारी की संलिप्तता एक गहरे संस्थागत भ्रष्टाचार को दर्शाती है, जिसके लिए केवल गिरफ्तारियां काफी नहीं हैं, बल्कि KPSC की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की आवश्यकता है।"

जेल में पूछताछ के साथ-साथ, अन्य संदिग्धों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। 51वीं सिटी सिविल और सत्र न्यायालय ने KPSC सदस्य शांता होसमणि की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। होसमणि, जिनकी नियुक्ति 2021 में हुई थी, राजपत्रित परिवीक्षकों (Gazetted Probationers) की भर्ती में भ्रष्टाचार के मामले में मुख्य संदिग्ध हैं, जिसके परिणाम अभी प्रतीक्षित हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद से ही सुश्री होसमणि फरार हैं। ED ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है ताकि वे देश छोड़कर न भाग सकें। अब CID और ED दोनों ही उन्हें जल्द से जल्द हिरासत में लेने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर चुके हैं।

क्या आप जानते हैं?: बेंगलुरु की परप्पणा अग्रहारा केंद्रीय जेल भारत की सबसे हाई-प्रोफाइल जेलों में से एक है, जहाँ अक्सर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों और सफेदपोश अपराधियों को रखा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

KPSC पशु चिकित्सा अधिकारी घोटाले में मुख्य संदिग्ध कौन हैं?
पूर्व परीक्षा नियंत्रक और निलंबित IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बिचौलिया बसवराज कन्नाले इस मामले के मुख्य संदिग्ध हैं।

KPSC सदस्य शांता होसमणि की वर्तमान स्थिति क्या है?
कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है और वे फिलहाल फरार हैं, जिसके कारण ED ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है।