तेलंगाना में ग्रामीण महिलाएं अब केवल बचत समूहों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मेगावाट-स्केल सौर ऊर्जा संयंत्रों की मालिक बनकर स्वच्छ ऊर्जा और आर्थिक स्वतंत्रता की नई राह बना रही हैं।
- स्वयं सहायता समूहों (SHGs) का बचत समूहों से सौर ऊर्जा उद्यमियों में परिवर्तन।
- इंदिरा महिला शक्ति (IMS) कार्यक्रम के तहत मेगावाट-स्केल सौर परियोजनाओं का स्वामित्व।
- ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए स्रोत और सामुदायिक संपत्ति का निर्माण।
तेलंगाना के विकाराबाद जिले की पथरीली जमीन पर लगे सौर पैनलों की कतारें केवल बिजली उत्पादन का साधन नहीं हैं, बल्कि यह राज्य की ग्रामीण महिलाओं की बदलती महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक हैं। स्वयं सहायता समूह (SHGs), जो कभी केवल छोटी बचत और ऋण तक सीमित थे, अब इंदिरा महिला शक्ति (IMS) कार्यक्रम के माध्यम से बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा संयंत्रों के मालिक और संचालक बन रहे हैं।
विकाराबाद जिला समाख्या और कोटेपल्ली मंडल समाख्या ने मिलकर बरवाड़ गांव में 1 मेगावाट (MW) का ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट स्थापित किया है। इस परियोजना का नेतृत्व कर रही 38 वर्षीय के. भाग्यलक्ष्मी, जो एक गृहणी हैं, बताती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इतने बड़े उद्यम का हिस्सा बनेंगी। यह पहल ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को 'लाभार्थी' से बदलकर 'संपत्ति मालिक' (Asset Owner) के रूप में स्थापित कर रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मॉडल केवल आर्थिक लाभ के बारे में नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण शासन में महिलाओं के सशक्तिकरण का एक नया अध्याय है। जब महिलाएं बुनियादी ढांचे और ऊर्जा उत्पादन जैसी तकनीकी संपत्तियों का स्वामित्व लेती हैं, तो समाज में उनकी निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक स्थिति में व्यापक सुधार होता है।
इस परियोजना का कार्यान्वयन सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पावर्टी (SERP) और तेलंगाना रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TGREDCO) द्वारा किया जा रहा है। SERP के निदेशक एम.वी. कृष्णा के अनुसार, ₹2.84 करोड़ की लागत से बने इस 1-MW प्लांट से सालाना लगभग 18.3 लाख यूनिट बिजली पैदा होने की उम्मीद है, जिसका टैरिफ ₹3.13 प्रति यूनिट तय किया गया है।
यह मॉडल एक 'विन-विन-विन' स्थिति है: अनुपयोगी सरकारी भूमि का संरक्षण, पर्यावरण के अनुकूल हरित ऊर्जा का उत्पादन और ग्रामीण गरीब महिलाओं के लिए निरंतर आय।
वर्तमान में खम्मम, कुमाराम भीम आसिफाबाद, विकाराबाद, पेड्डापल्ली, वनपर्थी, जंगांव और महबूबनगर जैसे जिलों में कुल 9 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। एक 1-MW प्लांट के लिए लगभग चार एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है, जो प्रतिदिन करीब 4,500 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। इससे मासिक रूप से ₹4.5 लाख से ₹5 लाख तक का सकल राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।
| विशेषता | विवरण
|---|
| कुल स्थापित क्षमता (वर्तमान) | 9 मेगावाट (7 जिलों में)
| प्रति यूनिट टैरिफ | ₹3.13
| संभावित मासिक राजस्व (1MW) | ₹4.5 लाख - ₹5 लाख
| एमएसएमई सब्सिडी | ₹50 लाख तक
पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री दानासारी अनसुया सीतक्का ने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को एक मजबूत आर्थिक आधार प्रदान करना और उन्हें पूर्ण आर्थिक स्वतंत्रता की ओर ले जाना है। बिजली खरीद के लिए वितरण कंपनियों (DISCOMs) के साथ पहले ही समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इंदिरा महिला शक्ति (IMS) कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को केवल लघु ऋणों के बजाय बड़े उत्पादक संपत्तियों का मालिक बनाना है ताकि वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें।
प्रश्न 2: इन सौर संयंत्रों से होने वाली आय का उपयोग कैसे किया जाएगा?
उत्तर: उत्पन्न राजस्व सीधे SHG फेडरेशन (समाख्या) को जाएगा, जिससे हजारों ग्रामीण गरीब महिलाओं को लाभ होगा।