गौहाटी उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि 'तलाक-ए-हसन' भारत में तलाक का एक वैध तरीका है। अदालत ने याचिकाकर्ता को असम के नए पंजीकरण अधिनियम 2024 के तहत तलाक दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
- गौहाटी उच्च न्यायालय ने 'तलाक-ए-हसन' की वैधता को बरकरार रखा।
- अदालत ने याचिकाकर्ता को असम अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम 2024 के तहत पंजीकरण के लिए निर्देशित किया।
- तलाक-ए-हसन में पति तीन लगातार महीनों तक एक बार 'तलाक' शब्द का उच्चारण करता है।
गौहाटी उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया है कि 'तलाक-ए-हसन' अभी भी देश में तलाक का एक वैध रूप है। न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के माध्यम से लिया गया तलाक कानूनी रूप से मान्य है, बशर्ते इसे निर्धारित नियमों के तहत पंजीकृत किया जाए।
यह मामला बरपेटा जिले के गेलाबिल गांव के निवासी रकीबुल भुयान से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, उनकी पत्नी ने शादी के दो साल बाद 2018 में उन्हें छोड़ दिया था। सुलह के तमाम प्रयास विफल होने के बाद, उन्होंने 22 मार्च, 26 अप्रैल और 27 मई 2026 को क्रमशः 'तलाक-ए-हसन' का उच्चारण किया। तीसरे उच्चारण के साथ ही उन्होंने माना कि विवाह समाप्त हो गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह फैसला 'तलाक-ए-बिदत' (तत्काल तीन तलाक) और 'तलाक-ए-हसन' के बीच के कानूनी अंतर को रेखांकित करता है। जहाँ तत्काल तीन तलाक को भारत में अपराध घोषित किया गया है, वहीं तलाक-ए-हसन, जो एक लंबी और विचारशील प्रक्रिया है, अभी भी मान्य है। यह स्पष्टता मुस्लिम समुदाय के भीतर वैवाहिक विवादों के समाधान के लिए कानूनी ढांचे को मजबूती प्रदान करती है।
याचिकाकर्ता ने जब पश्चिमी असम के बरपेटा में उप-रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण के लिए आवेदन किया, तो उसे अस्वीकार कर दिया गया। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि 1935 का पुराना अधिनियम निरस्त हो चुका है और नए अधिनियम के तहत प्रक्रियाएं अलग हैं। हालांकि, अदालत ने पाया कि असम अनिवार्य पंजीकरण (मुस्लिम विवाह और तलाक) अधिनियम, 2024 के तहत पंजीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता।
"तलाक-ए-हसन की वैधता यह दर्शाती है कि कानून केवल मनमाने फैसलों का विरोध करता है, न कि उन प्रक्रियाओं का जिनमें समय और सुलह की गुंजाइश होती है।"
न्यायालय ने निर्देश दिया कि विवाह और तलाक रजिस्ट्रार आवेदन पर विचार करें और इस बात की पुष्टि करें कि तलाक वास्तव में याचिकाकर्ता द्वारा ही दिया गया था। यदि पंजीकरण फिर से खारिज किया जाता है, तो याचिकाकर्ता अधिनियम की धारा 17 के तहत अपील कर सकता है।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पत्नी, जो नोटिस के बावजूद उपस्थित नहीं हुई, अभी भी किसी उपयुक्त फोरम के समक्ष इस तलाक को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र है। यह कदम न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों को सुनिश्चित करता है ताकि दोनों पक्षों को सुना जा सके।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: तलाक-ए-हसन क्या है?
उत्तर: यह तलाक का वह रूप है जिसमें पति तीन लगातार महीनों तक एक बार 'तलाक' शब्द का उच्चारण करता है, जिससे तलाक की प्रक्रिया पूरी होती है।
प्रश्न 2: क्या यह 'तीन तलाक' (Triple Talaq) जैसा ही है?
उत्तर: नहीं, 'तलाक-ए-बिदत' (एक बार में तीन तलाक) अवैध और दंडनीय है, जबकि तलाक-ए-हसन एक विस्तारित प्रक्रिया है जिसे अदालत ने वैध माना है।