YSRCP नेता साके साइलाजनथ ने आरोप लगाया है कि श्रीशैलम जलाशय के भरा होने के बावजूद रायलसीमा परियोजनाओं को पानी नहीं दिया जा रहा है, जिससे किसान संकट में हैं।

  • रायलसीमा में 54% से 56% वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
  • श्रीशैलम जलाशय के पूर्ण होने के बावजूद पानी के वितरण में विफलता का आरोप।
  • किसानों के लिए पूर्ण मुआवजा और ऋण-ग्रस्तता के कारण आत्महत्या करने वालों के परिवारों को ₹7 लाख की मांग।

आंध्र प्रदेश की राजनीति में जल संकट एक बड़ा मुद्दा बन गया है। YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के वरिष्ठ नेता साके साइलाजनथ ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार के पास El Niño (एल नीनो) के कारण उत्पन्न होने वाली सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस आकस्मिक योजना (Contingency Plan) नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए प्राकृतिक घटनाओं का सहारा ले रही है।

साइलाजनथ ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य में वर्षा में 54% से 56% की भारी गिरावट आई है। इसका सबसे बुरा असर रायलसीमा क्षेत्र की वर्षा-आधारित फसलों, विशेष रूप से मूंगफली, कपास और दालों पर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि हालांकि किसानों को वैकल्पिक फसलें उगाने की सलाह दी गई थी, लेकिन सरकार ने मूंगफली और अरहर के बीजों की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की, जिससे किसान असहाय हो गए हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the tension between infrastructure development and agricultural sustainability is peaking in Andhra Pradesh. While the government pushes for the growth of Amaravati and high-tech data centers, the agrarian heartland of Rayalaseema is facing an existential crisis. The disconnect between urban investment and rural survival could lead to significant socio-economic instability.

सिंचाई की समस्या पर बात करते हुए, नेता ने खुलासा किया कि नेल्लोर बैराज के तहत लगभग 3,500 एकड़ धान की फसल पानी की कमी के कारण सूखने की कगार पर है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि श्रीशैलम जलाशय पूरी तरह भरा होने के बावजूद, रायलसीमा की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है, जो प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।

कृषि संकट केवल वर्षा की कमी नहीं, बल्कि जल प्रबंधन और वितरण की रणनीतिक विफलता का परिणाम है।

साइलाजनथ ने सरकार से मांग की है कि सूखे से हुए नुकसान के लिए प्रति एकड़ पूर्ण मुआवजा दिया जाए और मुफ्त फसल बीमा योजना को बहाल किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने पिछले दो वर्षों में कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों के लिए ₹7 लाख के मुआवजे की मांग की है।

उन्होंने पशुधन और बागवानी की स्थिति पर चिंता जताते हुए मुफ्त टैंकर पानी और चारे की मांग की, क्योंकि चारे की कमी के कारण किसान अपने मवेशियों को बेचने पर मजबूर हैं। उन्होंने सरकार के निवेश प्राथमिकताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा, "डेटा सेंटर भोजन प्रदान नहीं कर सकते।"

क्या आप जानते हैं?: एल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जिसमें प्रशांत महासागर का सतही पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिससे भारत सहित कई देशों में मानसून कमजोर हो जाता है और सूखे की स्थिति पैदा होती है।

Frequently Asked Questions

1. साइलाजनथ ने सरकार से मुख्य रूप से क्या मांग की है?
उन्होंने सूखे के लिए पूर्ण मुआवजा, मुफ्त फसल बीमा, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को ₹7 लाख की सहायता और पशुओं के लिए मुफ्त चारे की मांग की है।

2. रायलसीमा में कौन सी फसलें सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं?
मुख्य रूप से मूंगफली, कपास और दालें (विशेषकर अरहर) सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं।