कर्नाटक सरकार नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 'नम्मा सेवे' ऐप लॉन्च करने जा रही है, जिसमें फीडबैक सिस्टम और AI आधारित शिकायत निवारण शामिल होगा। इसका उद्देश्य सभी सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन लाना और पारदर्शिता बढ़ाना है।

  • 'नम्मा सेवे' ऐप का लॉन्च 2 अक्टूबर से पहले संभावित है, जो कचरा और गड्ढों जैसी समस्याओं की रिपोर्टिंग की सुविधा देगा।
  • सरकार शेष 156 ऑफलाइन सेवाओं को ऑनलाइन लाने और सभी के लिए एक सिंगल लॉगिन आईडी बनाने की योजना बना रही है।
  • गलत विभाग में जाने वाली शिकायतों को सही जगह पहुँचाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जाएगा।
  • नागरिकों के लिए रेटिंग सिस्टम शुरू होगा, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

कर्नाटक सरकार अपने प्रजा सेवा अभियान के दायरे को बढ़ाते हुए डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान को अब 'नम्मा सेवे' मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। इस ऐप के जरिए न केवल सरकारी सेवाओं का लाभ उठाया जा सकेगा, बल्कि नागरिक अपने आसपास की बुनियादी समस्याओं जैसे सड़कों के गड्ढों और कचरे के ढेर की शिकायत भी सीधे कर सकेंगे।

वर्तमान में, सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली कुल 2,456 सेवाओं में से 2,300 ऑनलाइन उपलब्ध हैं। प्रजा सेवा विभाग के प्रधान सचिव हर्ष गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि शेष 156 सेवाओं को भी जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह होगा कि नागरिकों को अब हर सेवा के लिए अलग-अलग लॉगिन आईडी की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि एक 'कॉमन सिटीजन लॉगिन आईडी' प्रदान की जाएगी, जिससे उपयोगकर्ता अनुभव सरल हो जाएगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केवल डिजिटलीकरण नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का एक प्रयास है। जब नागरिक किसी सेवा को कम रेटिंग देंगे, तो संबंधित अधिकारी को उसका स्पष्टीकरण देना होगा, जिसे उच्च अधिकारियों द्वारा समीक्षा किया जाएगा। यह प्रणाली नौकरशाही की सुस्ती को खत्म करने और 'नागरिक-केंद्रित' प्रशासन स्थापित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव हो सकता है।

डिजिटल गवर्नेंस में AI का एकीकरण मानवीय त्रुटियों को कम करता है और शिकायत निवारण की गति को कई गुना बढ़ा देता है।

प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, अधिकारियों को अब किसी भी आवेदन को खारिज करने के लिए 21 दिनों के भीतर एक ठोस कारण देना अनिवार्य होगा। यदि कोई अधिकारी बिना कारण बताए बार-बार आवेदनों को खारिज करता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ये प्रावधान पहले से ही सकला योजना के तहत मौजूद थे, लेकिन अब इन्हें सख्ती से लागू किया जाएगा।

हालिया आंकड़ों के अनुसार, 5 सितंबर से शुरू हुए अभियान के बाद अब तक 26,387 शिकायतों में से 13,872 (52.6%) का निपटारा किया जा चुका है। राजस्व विभाग में सबसे अधिक शिकायतें (35.1%) दर्ज की गईं, जबकि शहरी विकास और आवास विभाग क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

विभाग शिकायतों का प्रतिशत प्रमुख मुद्दे
राजस्व विभाग 35.1% RTC/पहानी, भूमि रिकॉर्ड
शहरी विकास 16.2% नगर निगम सेवाएं
आवास विभाग 14.9% हाउस साइट योजनाएं
क्या आप जानते हैं?: कर्नाटक की 'सकला' योजना भारत की उन शुरुआती पहलों में से एक थी जिसने सरकारी सेवाओं के लिए समय-सीमा (Time-bound delivery) को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया था।

Frequently Asked Questions

1. 'नम्मा सेवे' ऐप का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों पर लाना, शिकायतों के लिए AI का उपयोग करना और रेटिंग सिस्टम के जरिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है।

2. यदि कोई अधिकारी आवेदन खारिज करता है तो क्या प्रक्रिया है?
अधिकारी को 21 दिनों के भीतर आवेदन खारिज करने का स्पष्ट कारण देना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।