गौतम बुद्ध नगर जेल में बंद 24 वर्षीय हिमांशु ठाकुर ने अपनी शैक्षणिक यात्रा को नहीं रोका और UGC-NET इतिहास परीक्षा में 99.3 परसेंटाइल स्कोर किया। पुलिस द्वारा हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार हिमांशु ने जेल के कठिन समय को अध्ययन के अवसर में बदल दिया।

  • हिमांशु ठाकुर ने गौतम बुद्ध नगर जेल में रहते हुए UGC-NET इतिहास परीक्षा में 99.3 परसेंटाइल प्राप्त किया।
  • उन पर नोएडा विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने और समन्वय करने के आरोप हैं।
  • हिमांशु दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं और जामिया मिलिया इस्लामिया से पीएचडी करने की योजना बना रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की गौतम बुद्ध नगर जिला जेल की सलाखों के पीछे एक असाधारण शैक्षणिक उपलब्धि सामने आई है। 24 वर्षीय हिमांशु ठाकुर, जिन्हें अप्रैल में नोएडा विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, ने यह साबित कर दिया कि प्रतिकूल परिस्थितियां भी ज्ञान की भूख को नहीं रोक सकतीं। हिमांशु ने हाल ही में घोषित UGC-NET परिणामों में इतिहास विषय में 99.3 परसेंटाइल स्कोर किया है।

हिमांशु को 18 अप्रैल को उत्तर दिल्ली के शालीमार बाग स्थित उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने में मदद की और मुख्य आरोपी आदित्य आनंद के साथ संपर्क में थे। उनके खिलाफ कुल 11 एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिनमें से आठ में उन्हें जमानत मिल चुकी है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this case highlights a growing trend of intellectual resistance within correctional facilities. When political activists turn prison cells into study rooms, it challenges the traditional narrative of incarceration as a purely punitive process, transforming it instead into a space for academic rigor and mental fortitude.

हिमांशु की बहन नेहा ठाकुर ने बताया कि उनके भाई ने जेल में भी अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि हिमांशु ने जेल के भीतर कम से कम 15 पुस्तकें पढ़ी हैं और वर्तमान में एक रिसर्च पेपर पर काम कर रहे हैं। उनके पिता, जो एक सेवानिवृत्त पोस्टमास्टर हैं, इस पूरी स्थिति से गहरे सदमे में हैं, जबकि उनकी माता ने अपने बेटे के समर्थन में स्वयं विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया।

शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है, बल्कि कठिनतम समय में भी स्वयं को मानसिक रूप से जीवित रखने का एक सशक्त माध्यम है।

जेल के भीतर हिमांशु अकेले नहीं हैं। उनके साथ बंद अन्य कार्यकर्ताओं ने भी बौद्धिक गतिविधियों को जारी रखा है। पत्रकार सत्यम वर्मा, जो एनएसए (NSA) के तहत बंद हैं, उन्होंने बर्टोल्ट ब्रेख्त की रचनाओं का हिंदी में अनुवाद किया है। इन कैदियों ने मिलकर जेल की लाइब्रेरी की सफाई और मरम्मत भी की है, जिसके लिए उन्हें सप्ताह में एक बार अनुमति दी जाती है।

हिमांशु का शैक्षणिक रिकॉर्ड हमेशा से शानदार रहा है। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव 2023 में दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन की ओर से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार थे और क्रांतिकारी वर्कर्स पार्टी (इंडिया) के सदस्य भी हैं।

क्या आप जानते हैं?: UGC-NET परीक्षा भारत में विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर बनने और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) प्राप्त करने के लिए सबसे कठिन पात्रता परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।

Frequently Asked Questions

1. हिमांशु ठाकुर को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया था?
उन पर अप्रैल में हुए नोएडा विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने और समन्वय करने का आरोप है।

2. हिमांशु ने जेल में अपनी पढ़ाई कैसे जारी रखी?
उनके दोस्तों और परिवार ने उन्हें बाहर से अध्ययन सामग्री और पुस्तकें उपलब्ध कराईं, और उन्होंने जेल की लाइब्रेरी का उपयोग किया।