ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में रक्षा, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण चर्चाएं की गईं।

  • भारत और रूस के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य।
  • रूस द्वारा भारत को पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट बेचने के प्रस्ताव पर चर्चा।
  • नागरिक परमाणु सहयोग और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की आपूर्ति पर विशेष जोर।

नई दिल्ली में भारी बारिश के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार दोपहर एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। यह मुलाकात दो दिवसीय ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर हुई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना है। बैठक का मुख्य केंद्र व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग रहा।

ऊर्जा क्षेत्र में रूस भारत के सबसे बड़े कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बना हुआ है। हालांकि अगस्त में आयात में 26 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, लेकिन भारत अभी भी प्रतिदिन लगभग दो मिलियन बैरल तेल खरीद रहा है। यह निर्भरता विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण हो गई है जब ईरान में युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह बैठक केवल व्यापारिक नहीं बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन का संकेत है। अमेरिका और पश्चिम के दबाव के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। यह दर्शाता है कि भारत एक 'बहु-ध्रुवीय दुनिया' (Multipolar World) के निर्माण में विश्वास रखता है जहां वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए किसी भी वैश्विक शक्ति के साथ स्वतंत्र संबंध रख सकता है।

रक्षा क्षेत्र में, चर्चा का सबसे रोमांचक बिंदु सुखोई Su-57 फाइटर जेट की बिक्री का प्रस्ताव है। यह पांचवीं पीढ़ी का एक स्टील्थ विमान है, जिसे अमेरिका के F-22 रैप्टर और F-35 लाइटनिंग के मुकाबले विकसित किया गया है। यदि यह सौदा होता है, तो भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता और स्टील्थ क्षमताओं में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

"भारत-रूस संबंध केवल लेन-देन पर आधारित नहीं हैं, बल्कि यह एक समय-परीक्षित रणनीतिक साझेदारी है जो वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के दौर में और भी महत्वपूर्ण हो गई है।"

इसके अतिरिक्त, दोनों नेताओं ने नागरिक परमाणु सहयोग को मजबूत करने, ईंधन आपूर्ति और जीवन चक्र समर्थन (life cycle support) पर चर्चा की। साथ ही, आधुनिक तकनीक के लिए आवश्यक 'क्रिटिकल मिनरल्स' की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बातचीत हुई।

ऐतिहासिक रूप से, यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से पुतिन की पहली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत उपस्थिति है। इससे पहले पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात किर्गिस्तान में एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी, जहां मोदी ने 'शांति के संदेश' पर जोर दिया था।

क्षेत्र वर्तमान स्थिति (FY25) लक्ष्य (2030)
द्विपक्षीय व्यापार ~$70 बिलियन $100 बिलियन
तेल आयात ~2 मिलियन बैरल/दिन स्थिर/रणनीतिक वृद्धि
क्या आप जानते हैं?: Su-57 एक 'स्टील्थ' विमान है, जिसका अर्थ है कि यह रडार की नजरों से बचकर दुश्मन के क्षेत्र में प्रवेश करने में सक्षम है।

Frequently Asked Questions

1. पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रक्षा (विशेषकर Su-57 जेट), ऊर्जा सुरक्षा, नागरिक परमाणु सहयोग और द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर चर्चा करना था।

2. यूक्रेन युद्ध के बावजूद भारत रूस से तेल क्यों खरीद रहा है?
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए रूस से रियायती दरों पर तेल खरीद रहा है, जिसे वह अपने राष्ट्रीय हित में मानता है।