नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने मुलाकात की। इस उच्च-स्तरीय बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य और यूक्रेन संकट के समाधान पर गहन चर्चा हुई।
- भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य पर चर्चा की।
- पीएम मोदी ने यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए पुतिन से 'युद्ध के अंत' की दिशा में बढ़ने का आग्रह किया।
- ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया गया।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के हाशिए पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। यह मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की यह पहली ऐसी भागीदारी है जो रूस के बाहर किसी ब्रिक्स सम्मेलन में हुई है। बैठक का मुख्य केंद्र रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्र रहे।
दोनों नेताओं ने व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई। सूत्रों के अनुसार, चर्चा का मुख्य बिंदु 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रहा। इसके अलावा, भारत ने रूसी बाजार में अधिक पहुंच और कुशल भारतीय श्रमिकों के रूस जाने की संभावनाओं पर भी बात की।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण यह दर्शाता है कि ईरान संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूस एक अपरिहार्य ऊर्जा भागीदार बना हुआ है। पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बरकरार रखा है, जिससे वह रूस से किफायती ईंधन प्राप्त करने और साथ ही वैश्विक शांति का दूत बनने की दोहरी भूमिका निभा पा रहा है।
"भारत और रूस के बीच का यह संबंध केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संतुलन है जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।"
यूक्रेन युद्ध के पांचवें वर्ष में प्रवेश के साथ, पीएम मोदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि भारत तटस्थ नहीं है, बल्कि वह शांति के पक्ष में खड़ा है। उन्होंने पुतिन से आग्रह किया कि अब 'अंतहीन युद्ध' को समाप्त कर शांति की दिशा में कदम बढ़ाए जाने चाहिए। यह चर्चा बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई संक्षिप्त मुलाकात का विस्तार थी।
बैठक में औद्योगिक सहयोग पर भी जोर दिया गया, जिसमें भारत में INNOPROM के आयोजन, रेलवे और टनलिंग में सहयोग, और स्टील वैल्यू चेन के विकास जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके साथ ही, दोनों देशों ने परमाणु ईंधन और उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक संयुक्त उद्यमों पर विचार-विमर्श किया।
| क्षेत्र (Sector) | प्रमुख चर्चा बिंदु (Key Focus) |
|---|---|
| व्यापार (Trade) | 2030 तक $100 बिलियन का लक्ष्य |
| ऊर्जा (Energy) | स्थिर ईंधन आपूर्ति और परमाणु सहयोग |
| शांति (Peace) | यूक्रेन युद्ध का तत्काल समाधान |
| उद्योग (Industry) | रेलवे, टनलिंग और स्टील चेन |
Frequently Asked Questions
1. भारत और रूस के बीच व्यापार का लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों ने 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
2. यूक्रेन युद्ध पर पीएम मोदी का क्या रुख है?
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया है कि भारत शांति के पक्ष में है और उन्होंने पुतिन से युद्ध को समाप्त कर शांति की ओर बढ़ने का आग्रह किया है।