मेजर जनरल (रिटायर्ड) जी जी द्विवेदी विश्लेषण करते हैं कि कैसे 11 सितंबर के हमलों ने वैश्विक सुरक्षा को पारंपरिक युद्ध से हटाकर 'असममित युद्ध' (Asymmetric Warfare) की ओर मोड़ दिया और आतंकवाद का स्वरूप डिजिटल हो गया।
- 9/11 ने दुनिया को गैर-राज्य अभिनेताओं (Non-state actors) द्वारा संचालित 'असममित युद्ध' से परिचित कराया।
- 'आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध' (GWOT) विशिष्ट लक्ष्यों से हटकर राष्ट्र-निर्माण के एक अंतहीन 'फॉरएवर वॉर' में बदल गया।
- आधुनिक आतंकवाद अब पदानुक्रमित संगठनों के बजाय विकेंद्रीकृत और डिजिटल 'लोन वुल्फ' नेटवर्क में विकसित हो गया है।
11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमले केवल एक बड़ी त्रासदी नहीं थे, बल्कि वैश्विक सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थे। जब अल-कायदा के 19 आतंकवादियों ने चार विमानों को हाईजैक कर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर हमला किया, तो उन्होंने एक नए युग की शुरुआत की: असममित युद्ध (Asymmetric Warfare)। इस रणनीति ने यह साबित कर दिया कि दूरदराज के सुरक्षित ठिकानों से संचालित होने वाले 'गैर-राज्य अभिनेता' एक वैश्विक महाशक्ति को रणनीतिक झटका दे सकते हैं।
इसकी तत्काल प्रतिक्रिया में, अमेरिका ने 7 अक्टूबर, 2001 को 'ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम' शुरू किया। शुरुआती मिशन बिल्कुल स्पष्ट था: अल-कायदा को नष्ट करना, अफगानिस्तान में तालिबान शासन को हटाना और ओसामा बिन लादेन जैसे उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों को खत्म करना। उत्तरी गठबंधन के सहयोग से, अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने त्वरित सामरिक सफलता हासिल की और तालिबान को सत्ता से बेदखल कर दिया।
हालांकि, जो एक लक्षित मिशन के रूप में शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे 'आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध' (GWOT) और अंततः एक अंतहीन 'फॉरएवर वॉर' (Forever War) में बदल गया। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा अब केवल सटीक ड्रोन हमलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें विद्रोह-रोधी अभियान, शासन परिवर्तन और राष्ट्र-निर्माण जैसे जटिल कार्य शामिल हो गए। अमेरिका के पास उपग्रहों और साइबर क्षमताओं की तकनीकी श्रेष्ठता तो थी, लेकिन रणनीतिक लक्ष्य धुंधले पड़ गए।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि 'लड़ाइयां जीतने' और 'युद्ध जीतने' के बीच का अंतर ही GWOT की सबसे बड़ी विफलता थी। 2003 में इराक पर आक्रमण ने संसाधनों को भटकाया और ऐसी रिक्तता पैदा की जिसका फायदा ISIS जैसे समूहों ने उठाया। अगस्त 2021 में काबुल से अमेरिकी सेना की वापसी इस बात का प्रमाण थी कि सैन्य शक्ति बुनियादी ढांचे को तो नष्ट कर सकती है, लेकिन वह राजनीतिक वैधता या स्वदेशी शासन का विकल्प नहीं हो सकती।
बाहरी सैन्य शक्ति आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट कर सकती है, लेकिन वह वैध राजनीति और प्रभावी शासन का स्थान नहीं ले सकती।
आतंकवाद का स्वरूप भी पूरी तरह बदल चुका है। दो दशक पहले, आतंकवादी संगठन पदानुक्रमित थे, जिनका नेतृत्व स्पष्ट था और प्रशिक्षण शिविर भौतिक थे। आज, खतरा नेटवर्क आधारित और विकेंद्रीकृत है। अल-कायदा और ISIS जैसे समूह अब अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कमजोर राज्यों में फैल गए हैं, जहाँ भौतिक शिविरों की जगह स्मार्टफोन-आधारित कट्टरपंथ और एन्क्रिप्टेड संचार ने ले ली है।
तकनीक ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है। व्यावसायिक ड्रोन का उपयोग अब टोही और विस्फोटक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग मनोवैज्ञानिक युद्ध के लिए हो रहा है। क्रिप्टोकरेंसी ने वित्तीय लेन-देन को ट्रैक करना कठिन बना दिया है, जिससे आधुनिक आतंकवादी 'चेहराविहीन' (Faceless) हो गया है।
| विशेषता | आतंकवाद (2001) | आतंकवाद (वर्तमान) |
|---|---|---|
| संरचना | पदानुक्रमित / केंद्रीकृत | विकेंद्रीकृत / नेटवर्क आधारित |
| प्रशिक्षण | भौतिक शिविर | डिजिटल / स्मार्टफोन आधारित |
| संचार | कुरियर / फिक्स्ड लाइन | एन्क्रिप्टेड ऐप्स / सोशल मीडिया |
| फंडिंग | बैंक ट्रांसफर / नकदी | क्रिप्टोकरेंसी / डार्क वेब |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'असममित युद्ध' (Asymmetric Warfare) क्या है?
उत्तर 1: यह एक ऐसा संघर्ष है जहाँ opposing सेनाओं की सैन्य शक्ति में बहुत बड़ा अंतर होता है, जिससे कमजोर पक्ष गुरिल्ला युद्ध या आतंकवाद जैसे अपरंपरागत तरीकों का उपयोग करता है।
प्रश्न 2: इस संघर्ष को 'फॉरएवर वॉर' क्यों कहा जाता है?
उत्तर 2: यह आतंकवाद के खिलाफ युद्ध की उस लंबी और अनिश्चित प्रकृति को संदर्भित करता है, जहाँ लक्ष्य व्यक्तियों को पकड़ने से बदलकर पूरे देशों की राजनीतिक प्रणालियों को बदलने तक पहुँच गया था।