सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा पास करने वाले लगभग 1,700 यूपी पुलिस कांस्टेबलों को जॉइनिंग से पहले ट्रेनिंग और वेतन के रूप में 7 लाख रुपये से अधिक लौटाने को कहा गया है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।

  • लगभग 1,700 सेवारत कांस्टेबलों ने 4,543 पदों के लिए SI भर्ती परीक्षा पास की है।
  • विभाग ने ट्रेनिंग के लिए ₹2,70,982 और वेतन के लिए ₹4,63,150 की वसूली मांगी है।
  • कांस्टेबलों का तर्क है कि वे विभाग नहीं छोड़ रहे, केवल उच्च पद पर जा रहे हैं, इसलिए यह नियम लागू नहीं होना चाहिए।
  • उम्मीदवारों ने सितंबर की समय सीमा से पहले CM योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की अपील की है।

एक हैरान करने वाले प्रशासनिक विवाद में, उत्तर प्रदेश पुलिस के लगभग 1,700 कांस्टेबलों को, जिन्होंने सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा पास की है, एक बड़ी वित्तीय बाधा का सामना करना पड़ रहा है। 4,543 पदों के लिए आयोजित इस प्रतिस्पर्धी परीक्षा में सफल होने के बावजूद, इन अधिकारियों से नए पद पर कार्यभार संभालने से पहले 7,34,132 रुपये की भारी-भरकम राशि जमा करने को कहा गया है।

ये उम्मीदवार 60,244 पदों के लिए 2023 की भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा थे और उन्होंने 17 जून, 2025 से 26 अप्रैल, 2026 के बीच अपना प्रारंभिक प्रशिक्षण पूरा किया था। हालांकि उन्हें सितंबर के अंतिम सप्ताह तक SI के रूप में जॉइन करना है, लेकिन जिला पुलिस अधिकारियों ने नोटिस जारी कर ट्रेनिंग खर्च (₹2,70,982) और सेवा के दौरान मिले वेतन (₹4,63,150) की वसूली की मांग की है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह स्थिति विभागीय नियमों के उस कठोर कार्यान्वयन को दर्शाती है जो आंतरिक पदोन्नति को नजरअंदाज करता है। वर्तमान नियम कहता है कि यदि कोई कर्मचारी दो साल के भीतर सेवा छोड़ता है, तो वसूली की जाएगी। लेकिन ये कांस्टेबल इस्तीफा नहीं दे रहे हैं, बल्कि उसी संगठन में उच्च रैंक पर जा रहे हैं। उनसे लाखों रुपये मांगना वास्तव में विभाग के भीतर योग्यता और पेशेवर विकास को दंडित करने जैसा है।

विभागीय प्रक्रिया के माध्यम से पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों से वेतन वसूली की मांग करना प्रशासनिक रूप से विरोधाभासी और आर्थिक रूप से दमनकारी है।

प्रभावित अधिकारियों का तर्क है कि कांस्टेबलों के रूप में उन्हें जो प्रशिक्षण मिला है, वह उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक संपत्ति बना रहेगा और SI के रूप में उनके नए कार्यकाल में भी विभाग को लाभ पहुँचाएगा। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि जमा करना अधिकांश उम्मीदवारों के लिए आर्थिक रूप से असंभव है।

इसी कारण, विभिन्न जिलों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर राहत की मांग की गई है। कांस्टेबलों का अनुरोध है कि इस वसूली की शर्त को उन लोगों के लिए माफ कर दिया जाए जो विभाग के भीतर ही उच्च पद पर जा रहे हैं।

वर्तमान में यह मामला यूपी पुलिस मुख्यालय में विचाराधीन है। सितंबर की जॉइनिंग डेडलाइन नजदीक है, और इस पर लिया गया निर्णय भविष्य में सुरक्षा कर्मियों के आंतरिक करियर विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।

खर्च की श्रेणी मांगी गई राशि (INR) मांग का कारण
ट्रेनिंग लागत ₹2,70,982 राज्य द्वारा वहन किया गया प्रशिक्षण खर्च
वेतन वसूली ₹4,63,150 जून 2025 से अगस्त 2026 तक मिला वेतन
कुल राशि ₹7,34,132 प्रति उम्मीदवार कुल लागत
क्या आप जानते हैं?: 2023 की यूपी पुलिस भर्ती राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी भर्तियों में से एक थी, जिसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 60,000 से अधिक कांस्टेबलों की भर्ती करना था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: यूपी पुलिस सफल उम्मीदवारों से पैसे क्यों मांग रही है?
विभाग उस नियम को लागू कर रहा है जिसके तहत यदि कोई कर्मचारी जॉइनिंग के दो साल के भीतर सेवा छोड़ता है, तो उसे ट्रेनिंग और वेतन खर्च लौटाना पड़ता है।

प्रश्न 2: कांस्टेबलों का मुख्य तर्क क्या है?
उनका तर्क है कि वे पुलिस विभाग नहीं छोड़ रहे हैं, बल्कि उसी बल के भीतर उच्च पद (SI) पर जा रहे हैं, इसलिए वसूली का नियम उन पर लागू नहीं होना चाहिए।