सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद एक छात्र को ₹5 लाख के बॉन्ड का नोटिस भेजने वाले सब-इंस्पेक्टर शिवा पांडे को निलंबित कर दिया गया है। यह मामला जंतर-मंतर पर हुए CJP विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है।

  • सब-इंस्पेक्टर शिवा पांडे को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के उल्लंघन के लिए निलंबित किया गया।
  • छात्र अक्षत त्रिपाठी को ₹5 लाख के व्यक्तिगत बॉन्ड के लिए नोटिस जारी किया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे 'साहस' (dare) करार दिया।

उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने गुरुवार शाम को पुष्टि की कि सब-इंस्पेक्टर शिवा पांडे को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब उन्होंने जुलाई 20 को जंतर-मंतर पर हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्र और SFI नेता अक्षत त्रिपाठी को नोटिस तामील कराया था। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 सितंबर को जारी किए गए उस आदेश का सीधा उल्लंघन था, जिसमें प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया गया था।

मामले की गंभीरता तब बढ़ गई जब सुप्रीम कोर्ट में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हुई कि नोटिस वास्तव में किसने जारी किया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि जिला मजिस्ट्रेट ने नहीं, बल्कि किसी अन्य अधिकारी ने यह नोटिस जारी किया था, जिसे अब निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, यूपी डीजीपी कार्यालय ने बाद में स्पष्ट किया कि जिस एसीपी (कार्यकारी मजिस्ट्रेट) ने ₹5 लाख के बॉन्ड का नोटिस जारी किया था, उन्हें निलंबित नहीं किया गया है, बल्कि केवल नोटिस तामील कराने वाले सब-इंस्पेक्टर पर गाज गिरी है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this incident highlights a dangerous gap between judicial mandates and ground-level police execution. When a lower-ranking officer ignores a Supreme Court order to harass a student, it reflects a systemic culture of impunity. The court's sharp reaction indicates that the judiciary will not tolerate the misuse of preventive laws (like BNSS) to stifle student activism.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। सीजेआई ने सवाल किया, "जब हमने पहले ही आदेश को रद्द कर दिया है और निर्देश दिया है कि दर्ज एफआईआर पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, तो मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की?"

"The issuance of a ₹5 lakh bond notice to a student, despite a clear judicial quashing of cases, is a textbook example of administrative overreach and a violation of fundamental rights."

अक्षत त्रिपाठी, जो गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में BA LLB के छात्र हैं, ने अपनी याचिका में कहा कि उन्हें बिना किसी ठोस सबूत के 'सरकार विरोधी बातें फैलाने' और छात्रों को 'उकसाने' के आरोप में नोटिस दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन है।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय न्याय संहिता (BNSS) की धारा 126/135 का उपयोग आमतौर पर निवारक हिरासत या शांति बनाए रखने के लिए व्यक्तियों को बॉन्ड भरने के लिए मजबूर करने हेतु किया जाता है।

Frequently Asked Questions

1. छात्र को नोटिस क्यों भेजा गया था?
छात्र अक्षत त्रिपाठी पर आरोप था कि उन्होंने अन्य छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शांतिपूर्ण धरने में शामिल होने के लिए उकसाया था।

2. सुप्रीम कोर्ट का 1 सितंबर का आदेश क्या था?
अदालत ने परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को रद्द कर दिया था और किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।