नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ओडिशा की प्रसिद्ध कोरापुट कॉफी को वैश्विक मंच पर पेश किया गया। 'टाइगर ब्राइट' ब्रांड की इस अरबीका कॉफी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और मीडिया का ध्यान आकर्षित किया है।

  • ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कोरापुट की 'टाइगर ब्राइट' कॉफी को मीडिया किट का हिस्सा बनाया गया।
  • यह पहल आदिवासी किसानों के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का एक बड़ा कदम है।
  • कोरापुट कॉफी मुख्य रूप से 920-950 मीटर की ऊंचाई पर उगाई जाती है।
  • TDCCOL के सहयोग से पिछले सीजन में रिकॉर्ड 102.54 मीट्रिक टन कॉफी का उत्पादन हुआ।

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में ओडिशा की सांस्कृतिक और कृषि पहचान को एक नया वैश्विक आयाम मिला है। सम्मेलन में शामिल होने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और मीडिया कर्मियों को वितरित की गई किट में ओडिशा की प्रसिद्ध कोरापुट कॉफी को शामिल किया गया। 'टाइगर ब्राइट' ब्रांड के तहत पेश की गई इस प्रीमियम अरबीका कॉफी ने वैश्विक मंच पर ओडिशा के आदिवासी क्षेत्रों की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए कहा कि यह राज्य के स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने का एक उत्कृष्ट अवसर है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि कोरापुट कॉफी का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होना 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को मजबूती प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह ओडिशा की मिट्टी और यहाँ के लोगों की कड़ी मेहनत की पहचान है जिसे अब दुनिया देख रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की पहल केवल कृषि उत्पाद के प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्थाओं के सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली उपकरण है। जब कोई स्थानीय ब्रांड अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का हिस्सा बनता है, तो यह सीधे तौर पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में छोटे किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करता है।

कोरापुट कॉफी का वैश्विक मंच पर आना आदिवासी समुदायों के आर्थिक उत्थान और वैश्विक बाजार में उनकी पहचान का प्रतीक है।

कोरापुट जिले के नंदपुर और मछकुंड क्षेत्रों में उगाई जाने वाली यह कॉफी विशेष रूप से 920-950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसे आम, कटहल और नींबू जैसे पेड़ों की छाया में उगाया जाता है, जो इसे एक विशिष्ट स्वाद प्रदान करते हैं। इस कॉफी की सबसे बड़ी विशेषता इसका 100% अरबीका होना और इसके स्वाद में मौजूद चॉकलेट, कैरामेल और साइट्रस के नोट्स हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कोरापुट कॉफी ब्रांड की औपचारिक शुरुआत 11 सितंबर, 2019 को की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी किसानों के लिए एक संगठित बाजार बनाना और मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को मजबूत करना था। Tribal Development Co-operative Corporation of Odisha Ltd (TDCCOL) के सहयोग से, कॉफी की खरीद से लेकर प्रसंस्करण और मार्केटिंग तक की पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित किया जाता है।

Did You Know?: कोरापुट की कॉफी को सूरज की रोशनी में लकड़ी के ऊंचे बेड पर सुखाया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता और स्वच्छता बनी रहती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कोरापुट कॉफी की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर: यह 100% अरबीका कॉफी है जिसमें चॉकलेट, कैरामेल और ट्रोपिकल साइट्रस के स्वाद मिलते हैं।

प्रश्न 2: इस कॉफी का उत्पादन कौन करता है?
उत्तर: इसका उत्पादन मुख्य रूप से कोरापुट जिले के आदिवासी किसानों द्वारा किया जाता है।